नई दिल्ली। ब्रिटेन (UK) में रह रहे हजारों भारतीय डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों के लिए एक बेहद राहतभरी खबर सामने आई है। ब्रिटेन की गृह मंत्री शबाना महमूद ने विदेशी स्वास्थ्य सेवा कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास की प्रतीक्षा अवधि को 5 साल से बढ़ाकर 15 साल करने के अपने पिछले प्रस्ताव और सख्त रुख को पूरी तरह से बदल दिया है। ब्रिटिश सरकार के इस यू-टर्न से ब्रिटेन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) में कार्यरत हजारों भारतीय पेशेवरों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
ब्रिटिश सरकार ने आव्रजन पर लगाम लगाने की अपनी योजना के तहत ‘हेल्थ एंड सोशल केयर वीजा’ पर आए विदेशी कर्मचारियों के लिए यूके में स्थायी निवास (ILR) हासिल करने की समय-सीमा को 5 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा था।
इस प्रस्ताव की घोषणा के बाद से ही ब्रिटेन के एनएचएस (NHS), मेडिकल यूनियनों, ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन (BMA) और भारतीय स्वास्थ्य पेशेवरों द्वारा इसका तीखा विरोध किया जा रहा था। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि 15 साल का लंबा इंतजार योग्य डॉक्टरों और नर्सों को ब्रिटेन छोड़ने या अन्य देशों का रुख करने पर मजबूर कर देगा, जिससे ब्रिटेन की पहले से चरमराई स्वास्थ्य प्रणाली और गहरे संकट में आ सकती थी।
चौतरफा दबाव और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले संभावित बुरे प्रभाव को देखते हुए गृह मंत्री शबाना महमूद ने अपने फैसले में नरमी बरतते हुए पुराने 5 साल के नियम को ही बनाए रखने का निर्णय लिया है।
ब्रिटेन के हेल्थ एंड सोशल केयर वीजा पर जाने वाले विदेशी पेशेवरों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है। यूके के एनएचएस (NHS) में भारत से गए हजारों डॉक्टर, नर्स और केयर गिवर्स अपनी उत्कृष्ट सेवाएं दे रहे हैं।
मात्र 5 साल में स्थायी निवास मिलने से भारतीय पेशेवरों और उनके परिवारों को ब्रिटेन में बसने, घर खरीदने और आगे जाकर ब्रिटिश नागरिकता के लिए आवेदन करने का रास्ता आसान हो जाता है।
इस फैसले के बाद भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों के मन से अनिश्चितता और असुरक्षा का बादल हट गया है, जिससे वे बिना किसी मानसिक दबाव के ब्रिटेन में अपनी सेवाएं पूरी निष्ठा के साथ जारी रख सकेंगे।

