नई दिल्ली। अमेरिका के कृषि मंत्री ब्रुक रोलिंस और ऊर्जा मंत्री डग बर्गम ने अमेरिका-भारत व्यापार समझौते का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इस समझौते से किसानों, ऊर्जा कंपनियों और पूरी अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फायदा होगा।
ब्रुक रोलिंस ने कहा कि इस समझौते से भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार में अमेरिकी कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा। उनके अनुसार, नए अमेरिका-भारत समझौते से भारत में ज्यादा अमेरिकी कृषि उत्पाद भेजे जा सकेंगे, जिससे दाम बेहतर होंगे और ग्रामीण अमेरिका में ज्यादा पैसा पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि 2024 में भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा करीब 1.3 बिलियन डॉलर था। रोलिंस ने कहा कि भारत की बढ़ती आबादी के कारण वह अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए एक अहम बाजार है और यह समझौता इस घाटे को कम करने में मदद करेगा। उन्होंने इसे “अमेरिका फर्स्ट की जीत” बताया।
ऊर्जा मंत्री डग बर्गम ने ऊर्जा और निवेश पर जोर दिया। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से अमेरिका की ऊर्जा की बिक्री बढ़ेगी। बर्गम के मुताबिक, यह समझौता दिखाता है कि ऊर्जा से जुड़ी कूटनीति कैसे काम करती है और इससे अंतरराष्ट्रीय रिश्ते मजबूत होंगे, साथ ही अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा।
इससे पहले, ट्रंप ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन कॉल के बाद यह समझौता हुआ, जिससे भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ 18 प्रतिशत कम हो गए और अमेरिकी उत्पादों पर भारतीय व्यापार बाधाएं आसान हो गईं। ट्रंप ने कहा कि भारत रूसी तेल खरीदना भी बंद कर देगा और अमेरिकी ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और कृषि उत्पादों की खरीद बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करेगा और यूक्रेन में युद्ध खत्म करने के प्रयासों का समर्थन करेगा।
पूर्व अमेरिकी राजनयिक इवान फीगेनबाम ने इस घोषणा पर संतुलित प्रतिक्रिया देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार संबंधों में पिछली स्थिति अस्थिर थी और एक समझौता करना जरूरी था। उनके अनुसार 18 प्रतिशत शुल्क पहले की तुलना में बेहतर है, लेकिन भविष्य में इसे फिर दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
फाइगेनबाम ने यह भी सवाल उठाया कि क्या भारत निकट भविष्य में अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर के सामान की खरीद वास्तव में कर पाएगा। उनका कहना था कि इन आंकड़ों को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने माना कि यह समझौता कुछ महीनों पहले की तुलना में रिश्तों को बेहतर स्थिति में लाता है, लेकिन हालिया तनातनी से जो भरोसा टूटा है, उसे दोबारा बनाने में समय लगेगा।
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब पिछले कई महीनों से शुल्क और ऊर्जा नीति को लेकर दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। दोनों पक्षों के अधिकारियों का कहना है कि इसका मकसद संबंधों को फिर से पटरी पर लाना और व्यापार, ऊर्जा तथा रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाना है।

