भोपाल। प्रवर्तन निदेशालय के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय ने मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में डबल मनी घोटाले से जुड़े मामले में अजय तिडके और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट 30 जनवरी को जबलपुर की विशेष पीएमएलए कोर्ट में पेश की गई थी। इसके बाद आरोपियों को प्री-कोग्नाइजेंस सुनवाई के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। ईडी ने इसकी जानकारी दी है।
ईडी ने यह जांच तीन एफआईआर के आधार पर शुरू की थी, जो बालाघाट जिले की लांजी और किरणपुर पुलिस स्टेशनों में बीयूडीएस एक्ट, 2019 की धारा 21(1) और 21(2) तथा भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थीं।
जांच में पता चला कि अजय तिडके और उनके साथियों ने लगभग छह महीने तक एक धोखाधड़ी वाली ‘डबल मनी’ योजना चलाई। उन्होंने लोगों को झूठे वादे करके निवेश करने के लिए प्रेरित किया कि उनकी रकम थोड़े समय में दोगुनी हो जाएगी।
आरोपियों ने मिलकर एक योजना चलाई, पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए और निवेश राशि पर गारंटीड रिटर्न देने का वादा किया। जांच में यह सामने आया कि लगभग 1450 करोड़ रुपए निवेशकों से इकट्ठा किए गए।
जांच के दौरान, ईडी के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय ने दो “प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर” जारी किए, जिनमें 2.98 करोड़ रुपए की संपत्तियां और 25 अचल संपत्तियां जिनकी कीमत 1.50 करोड़ रुपए थी, कुल मिलाकर 4.48 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच की गईं।
इनमें से एक पीएओ को पीएमएलए के तहत निर्णयकारी प्राधिकारी द्वारा पहले ही मंजूरी दे दी गई है। संबंधित प्राधिकरणों द्वारा रोकी गई या अटैच की गई संपत्तियों को भी केंद्रीय सरकार के पास जब्ती के लिए भेजा गया है।
महेश तिडके, अजय तिडके, तिडके ब्रदर्स, और अन्य संबंधित संस्थाओं के बैंक खातों में 12.91 करोड़ रुपए जमा थे, जिन्हें बीयूडीएस एक्ट, 2019 और आईपीसी, 1860 के तहत फ्रीज किया गया क्योंकि इन खातों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ था।

