नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ के 9वें एडिशन के दूसरे एपिसोड के दौरान छात्रों से बातचीत की।
प्रधानमंत्री ने परीक्षा के दौरान तनाव और चिंता से कैसे निपटा जाए, इस बारे में चर्चा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुवाहाटी के छात्रों से चर्चा की। एक छात्र ने पीएम मोदी से उनकी डाइट को लेकर सवाल किया, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनकी डाइट का कोई सिस्टम ही नहीं रहा। वे हमेशा अलग-अलग जगह जाते रहते थे, जो रहता था, खा लेते थे। खुद भी पकाना पड़ता था, कई बार खिचड़ी पकानी पड़ती थी।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि सांस इतनी लो कि शरीर भर जाए। कुछ लोग शरीर को सबसे अंत में प्राथमिकता देते हैं। कुछ ने नियम बनाया है कि सूर्योदय देखेंगे तो देखेंगे। यह शरीर को ताजगी देता है। इसको आदत में शामिल करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि पढ़ाई और जुनून के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों को अकादमिक और रचनात्मक गतिविधियों को अलग या विरोधी रास्ते के रूप में नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों समान रूप से मूल्यवान हैं और उन्हें प्रभावी ढंग से संतुलित किया जा सकता है। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि कला और रचनात्मक शौक छात्रों को अकादमिक दबाव से होने वाले तनाव और थकान से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं।
‘वोकल फॉर लोकल’ जैसी पहलों पर भी जानकारी देते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतीय निर्मित उत्पादों को चुनने से घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। उन्होंने ‘वेड इन इंडिया’ अभियान का भी उल्लेख किया, जिसमें जोड़ों को विदेश के बजाय देश के भीतर ही शादियां करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। साथ ही नागरिकों द्वारा उठाया गया हर छोटा कदम 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान देता है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने छात्रों को छोटे स्टार्ट-अप के साथ अपनी उद्यमिता यात्रा शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि बड़े विचार अक्सर छोटी शुरुआत से ही पनपते हैं। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वास्तविक दुनिया की प्रणालियां कैसे काम करती हैं, यह समझने के लिए उद्योग के पेशेवरों से संपर्क करें और पाठ्यपुस्तकों से परे व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करें।

