मध्य प्रदेश: सीएम मोहन यादव ने ऊना नदी में छोड़े दुर्लभ कछुए और घड़ियाल के बच्चे

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भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क का दौरा किया और ऊना नदी में नवजात घड़ियाल और विलुप्त हो रहे कछुओं को छोड़ा।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 53 युवा घड़ियालों (28 नर और 25 मादा) को ऊना नदी में छोड़ा। इन घड़ियालों को दो वर्षों से अधिक समय तक देखभाल के लिए रखा गया था और अब उन्हें प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से पुनः स्थापित किया गया ताकि उनकी संख्या बढ़े और नदी पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बहाल हो सके।

घड़ियालों के साथ ही 25 नवजात, तीन धारीदार छत वाले कछुओं को भी नदी में छोड़ागया;, इनकी प्रजाति विलुप्त होने वाली है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “ये न केवल इन प्राचीन नदी निवासियों को एक नई शुरुआत देता है, बल्कि स्थायी संरक्षण, समुदाय की भागीदारी और मध्य प्रदेश को संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में मॉडल बनाने के हमारे संकल्प का सशक्त संदेश भी देता है।”

उन्होंने बताया कि ये प्राचीन जीव, डायनासोर युग के अवशेष, नदी पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और पानी को साफ रखने तथा पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।

ऊना नदी की उपनदी का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हाल ही में हमने 53 घड़ियाल के बच्चों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। लगभग ढाई साल के ये घड़ियाल नियंत्रित पर्यावरण में अंडों से बाहर निकले, उनका पालन-पोषण किया गया और अब उन्हें फिर से उनके प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा जा रहा है। यह प्रयास न केवल आबादी को बढ़ाएगा, बल्कि पर्यटकों के लिए भी अद्भुत अनुभव प्रदान करने के साथ ही साथ पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।”

उन्होंने कहा कि घड़ियाल और मगर नदी पारिस्थितिकी तंत्र के साथ सह-अस्तित्व में रहते हैं और हजारों वर्षों से जीवित प्राचीन जैव विविधता के प्रतीक हैं।

उन्होंने बताया, “इसके साथ ही हमने देश में दुर्लभ प्रजाति तीन-धारी छतरीदार कछुए को भी साफ और मुक्त बहाव वाली जलधारा में छोड़ा, ताकि नदी क्षेत्रों में उनकी संख्या बढ़े।”

क्षेत्र में संरक्षण प्रयासों को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि चंबल क्षेत्र का पालपुर-कुनो इलाका प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और ग्रामीण आजीविका के लिए सहायक है।

उन्होंने बताया, “हाल ही में हमने आठ और चीते जंगल में छोड़े। इससे हमारे संरक्षण प्रयासों में आत्मविश्वास बढ़ा। शुरुआत में 20 चीते में से 12 जीवित रहे और प्रजनन से आबादी 12 से बढ़कर 38 हो गई। नौ चीते छोड़ने के बाद यह संख्या अब 48 हो गई है। यह एक चुनौतीपूर्ण काम था।”

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