भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संविदा कर्मियों की भूमिका को राज्य के लिए हनुमान जी की तरह बताया है। उन्होंने कहा कि 10 वर्ष से अधिक का सेवाकाल पूरा कर चुके संविदा कर्मियों का नियमित पदों पर संविलियन किया जा रहा है। फिलहाल यह प्रक्रिया 50 फीसदी पदों पर चल रही है।
राजधानी के टीटी नगर दशहरा मैदान में भारतीय मजदूर संघ द्वारा आयोजित मध्यप्रदेश संविदा संयुक्त संघर्ष मंच के संविदा कर्मचारी-अधिकारी सम्मेलन में मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि 10 वर्ष से अधिक अनुभवी संविदाकर्मियों को नियमित पदों पर संविलियन की अभी तक 50 प्रतिशत पदों के लिए प्रक्रिया जारी है। इस दिशा में आगे और काम किया जाएगा। साथ ही सामान्य प्रशासन विभाग संविदा नीति-2023 के अंतर्गत सभी कंडिकाओं का केंद्र और राज्य पोषित परियोजनाओं में अक्षरश क्रियान्वयन किया जाएगा। राज्य शासन के निगम मंडल इसे लागू करेंगे।
उन्होंने कहा कि संविदा नीति-2023 के अंतर्गत सभी विभागों में संविदा कर्मियों के लिए एनपीएस, ग्रेज्युटी, स्वास्थ्य बीमा लाभ, अनुकंपा नियुक्ति के लिए केंद्र पोषित-राज्य पोषित समस्त योजनाओं-परियोजनाओं में एक साथ क्रियान्वयन तथा संविदा कर्मियों के लिए दंड के प्रावधान सीसीए रूल 1965, 1966 को पूर्णतरू लागू करने के संबंध में नीतिगत निर्णय कराया जाएगा। संविदा कर्मियों की समस्यओं के निराकरण अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा समय-सीमा में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि संविदाकर्मियों के श्रम और विश्वास पर ही राज्य सरकार जन कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में सफल हो रही है। संविदाकर्मियों की भूमिका हनुमान जी के समान है। श्रम और साझेदारी ने ही शासन-प्रशासन की व्यवस्था बनाई है। संविदाकर्मी अनुबंध से अवश्य आते हैं, किन्तु व्यवस्थाओं के प्रबंधन में विराट भूमिका निभाते हैं। स्वास्थ्य सेवाएं हों या शिक्षा, पंचायत, नगरीय निकाय या तकनीकी सेवाएं मैदानी स्तर पर सर्वे, मॉनीटरिंग और क्रियान्वयन में संविदा भाई-बहन हर जगह व्यवस्था के भरोसेमंद स्तंभ बनकर खड़े हैं।
मुख्यमंत्री यादव ने संविदा कर्मियों को भरोसा दिलाते हुए कहा है कि संविदा कर्मचारियों के लिए जो भी निर्णय हो सकते हैं, उससे अधिक करने का प्रयास करेंगे। नियम, न्याय और वित्तीय संतुलन के दायरे में रहते हुए संविदाकर्मियों की कठिनाइयों का हल निकाला जाएगा। मध्यप्रदेश संविदा संयुक्त संघर्ष मंच, वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग के साथ समन्वय करते हुए सभी कठिनाइयों का समाधान इस प्रकार किया जाएगा, जिससे संविदाकर्मियों का सम्मान और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हों। संविदाकर्मियों की उचित मांगों पर राज्य सरकार संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ उनका सहयोग करेगी।

