इमरान की पीटीआई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया, पार्टी ने अदालत का किया रुख

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नई दिल्ली। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने कराची और सिंध के अन्य हिस्सों में पार्टी कार्यकर्ताओं की कथित हिरासत के खिलाफ सोमवार को सिंध हाई कोर्ट का रुख किया। स्थानीय मीडिया के अनुसार, पीटीआई का आरोप है कि मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (एमपीओ) ऑर्डिनेंस के तहत की गई छापेमारी में 180 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

पीटीआई ने रविवार को आरोप लगाया था कि सिंध पुलिस ने तड़के पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के घरों पर छापेमारी कर करीब 180 लोगों को उठाया। हालांकि, सिंध सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।

याचिकाकर्ता पीटीआई सिंध के महासचिव मंसूर अली और इंसाफ लॉयर्स फोरम के अध्यक्ष फैसल मुगल ने अदालत से 1 फरवरी को जारी एमपीओ आदेश को चुनौती देने और पार्टी कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की है। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन के मुताबिक, उन्होंने इस आदेश को अवैध करार देने की अपील की है।

याचिका में कुल 14 प्रतिवादियों को नामित किया गया है, जिनमें प्रांतीय मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, सिंध के पुलिस महानिरीक्षक, सेंट्रल पुलिस ऑफिस, अतिरिक्त आईजीपी कराची पुलिस, पूर्व, पश्चिम और दक्षिण जोन के डिप्टी आईजी, कराची पूर्व, पश्चिम, दक्षिण, सेंट्रल, मलिर, कोरंगी और कीमारी जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शामिल हैं।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से एमपीओ आदेशों को “असंवैधानिक, अवैध, विधिक अधिकार से परे, प्रारंभ से ही शून्य और किसी भी कानूनी प्रभाव से रहित” घोषित करने की मांग की। याचिका में कहा गया है कि ये आदेश प्रांतीय कैबिनेट के किसी वैध निर्णय, मंजूरी या संतोष के बिना जारी किए गए, जिससे पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 4, 9, 10, 15, 16, 17, 19 और 25 का उल्लंघन हुआ है।

याचिका में यह भी दलील दी गई कि एक पंजीकृत और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल होने के नाते पीटीआई को शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियां संचालित करने का अधिकार है, जिनमें बैठकें, प्रदर्शन, हड़ताल और राजनीतिक अभिव्यक्ति शामिल हैं। पार्टी ने अदालत से अनुरोध किया कि विवादित आदेशों को पूरी तरह निरस्त कर उनके क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाई जाए।

पीटीआई ने अदालत से यह भी अपील की कि जिन लोगों को इन आदेशों के तहत गिरफ्तार किया गया, हिरासत में लिया गया या उनकी स्वतंत्रता छीनी गई है, यदि वे किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

इस बीच, सिंध सरकार ने पीटीआई के आरोपों को “झूठा और भ्रामक” बताते हुए खारिज कर दिया है। वरिष्ठ सिंध मंत्री और सूचना मंत्री शरजील मेमन ने कहा कि एमपीओ के तहत किसी भी तरह की सामूहिक गिरफ्तारी या हिरासत नहीं की गई। डॉन से बातचीत में उन्होंने कहा कि पीटीआई का बयान गलत जानकारी पर आधारित है और इसे अनावश्यक राजनीतिक माहौल बनाने के लिए जारी किया गया।

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