नई दिल्ली। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ चलाया ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ कामयाब रहा और ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल ने जो चाहा वो हासिल कर लिया। हेगसेथ के अनुसार ‘नई सत्ता’ के साथ उनकी बातचीत सही राह पर है।
बुधवार को पेंटागन में पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीजफायर की वजह बताई।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया कि ट्रंप के पास इतनी ताकत थी कि वो चाहें तो कुछ ही मिनटों में ईरान की पूरी अर्थव्यवस्था ठप कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
हेगसेथ ने कहा कि ट्रंप ने जानबूझकर नरमी दिखाई, क्योंकि ईरान ने दबाव में आकर सीजफायर मान लिया था। अमेरिका चाहता तो बड़ा नुकसान कर सकता था, लेकिन उसने रुकने का फैसला किया।
हेगसेथ के मुताबिक, ईरान की नई सरकार को समझ आ गया कि संघर्ष से उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा, इसलिए समझौता बेहतर था। नई सरकार ने अपने पुराने हालात से सबक लिया है। वे जानते हैं कि इस समझौते का मतलब है कि उनके पास “कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा।”
अमेरिका का दावा है कि उसने दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक को तबाह कर दिया। हेगसेथ ने अपनी पीठ थपथपाते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ ने 40 दिनों से भी कम समय में सिर्फ 10 फीसदी युद्ध क्षमता का इस्तेमाल करते हुए, “दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक” को खत्म कर दिया।
उन्होंने दावा किया कि ईरान अपना बचाव करने में नाकाम साबित हुआ, और तेहरान के खिलाफ यूएस-इजरायली संयुक्त अभियान में “प्लान के हिसाब से, शेड्यूल के हिसाब से हर एक मकसद” हासिल किया गया।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा, “ईरान की नौसेना समुद्र तल में चली गई है… ईरान के पास अब एयर डिफेंस सिस्टम नहीं है… उनका मिसाइल प्रोग्राम पूरी तरह से खत्म हो गया है।”
वहीं, जनरल डैन केन ने कहा कि देश की सेनाओं ने ईरान में 13,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया। 80 फीसदी एयर डिफेंस सिस्टम और 90 फीसदी से ज्यादा नौसैनिक बेड़े और 90 फीसदी हथियार फैक्ट्रियों को नष्ट कर दिया।
उन्होंने आगे कहा, “ईरान को किसी भी बड़ी जवाबी कार्रवाई के लिए जमीन तैयार करने में कई साल लग जाएंगे। और ये सीजफायर सिर्फ एक पॉज (ठहराव) है।” केन ने कहा कि अगर युद्ध अभियान फिर से शुरू करने का आदेश दिया जाता है या बुलाया जाता है तो सेना सामना करने को तैयार है।

