भारत वैश्विक संकट से और भी मजबूत होकर गुजरा है: शक्तिकांत दास

Shaktikant

नई दिल्ली। भारत ने वैश्विक संकटों के दौरान लगातार मजबूत लचीलापन (रेजिलिएंस) दिखाया है और सिर्फ उनसे उबरने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हर बार खुद को और मजबूत बनाकर उभरा है। यह बात प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास ने गुरुवार को कही।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एआईएमए नेशनल लीडरशिप कॉन्क्लेव में बोलते हुए शक्तिकांत दास ने कहा कि कठिन समय में भारत की यात्रा यह दिखाती है कि देश चुनौतियों के बावजूद लगातार आगे बढ़ता रहा है।

उन्होंने कहा, “हर संकट के दौरान देश ने सिर्फ मुश्किलों को झेला ही नहीं, बल्कि हर बार पहले से ज्यादा मजबूत बनकर बाहर निकला है।”

उन्होंने बताया कि इस समय वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता और तनाव से गुजर रही है, जहां भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में रुकावट और अलग-अलग क्षेत्रों में असमान विकास देखने को मिल रहा है।

दास ने कहा, “वैश्विक अर्थव्यवस्था में जोखिम फिलहाल नीचे की ओर ज्यादा झुके हुए हैं।” ऐसे माहौल में उन्होंने भारत के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन पर जोर दिया।

उन्होंने बताया कि देश ने वित्त वर्ष 2025-26 में 7.6 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर्ज की, जबकि पिछले पांच वर्षों में औसत वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है।

उन्होंने कहा कि भारत की ताकत सिर्फ संकट झेलने में नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों में खुद को बदलने और बेहतर बनाने में है।

दास के मुताबिक, मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता, लगातार नीति फैसले, इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास और मजबूत घरेलू मांग जैसे कारकों ने इस मजबूती को बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

महंगाई को नियंत्रित रखने के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर गरीबों पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि कम महंगाई से लोगों की खरीदने की क्षमता बढ़ती है और इससे पूरी अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलती है।

उन्होंने यह भी बताया कि संकट के दौरान भारत ने संतुलित नीतियां अपनाईं, जहां जरूरत पड़ने पर राजकोषीय और मौद्रिक कदम उठाए गए और समय पर उन्हें वापस भी लिया गया ताकि सिस्टम में असंतुलन न बने।

दास ने अर्थव्यवस्था में हो रहे संरचनात्मक बदलावों का भी जिक्र किया, जिसमें तेजी से डिजिटलीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और इलेक्ट्रॉनिक्स व सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टरों में वृद्धि शामिल है।

उन्होंने कहा, “वैश्विक स्तर पर भारत ने रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए अपने साझेदारी नेटवर्क को विविध बनाया है, जिससे किसी एक देश पर निर्भरता कम हुई है।”

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