मध्य प्रदेश : सीएम मोहन यादव जयपुर में उद्योग जगत के दिग्गजों से संवाद करेंगे

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भोपाल। मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रहे हैं। वे 21 मार्च को जयपुर के प्रसिद्ध होटल आईटीसी राजपूताना में आयोजित होने वाले ‘इंटरएक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट ऑपर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश’ में हिस्सा लेंगे। इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों के प्रमुख औद्योगिक समूहों के शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ विस्तार से चर्चा करेंगे। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश की नीतिगत स्पष्टता, प्रशासनिक सक्रियता और निवेश-अनुकूल वातावरण को राष्ट्रीय स्तर पर उद्योग जगत के सामने मजबूती से रखना है।

जयपुर में आयोजित होने वाले इस सत्र में मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियों, क्षेत्रवार दिए जा रहे विशेष प्रोत्साहनों और विकसित औद्योगिक क्षेत्रों की उपलब्धता का विस्तृत खाका पेश किया जाएगा। प्रदेश के प्रमुख सचिव (औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन) श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह राज्य में उपलब्ध अवसरों, लॉजिस्टिक नेटवर्क, सुदृढ़ अधोसंरचना और त्वरित स्वीकृति प्रणाली के बारे में जानकारी देंगे। कार्यक्रम के दौरान प्रमुख औद्योगिक समूहों के प्रतिनिधि भी अपने विचार साझा करेंगे, जिससे निवेश के लिए एक सहयोगात्मक वातावरण तैयार हो सके।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस सत्र के दौरान न केवल उद्योगपतियों को संबोधित करेंगे, बल्कि चयनित उद्योगपतियों के साथ ‘वन-टू-वन’ (व्यक्तिगत) मीटिंग भी करेंगे। इन बैठकों में प्रस्तावित परियोजनाओं और निवेश प्रस्तावों पर सीधी चर्चा होगी। मुख्यमंत्री का मुख्य जोर इस बात पर है कि निवेश को केवल उद्योग लगाने तक सीमित न रखकर उसे रोजगार सृजन, युवाओं के कौशल उन्नयन और राज्य के औद्योगिक विस्तार से जोड़ा जाए। वे उद्योगपतियों को राज्य सरकार के स्थिर नीतिगत वातावरण और पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया का भरोसा दिलाएंगे।

जयपुर में आयोजित यह निवेश संवाद मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति को एक नई गति देने की दिशा में एक दूरदर्शी कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री का यह सीधा संवाद राष्ट्रीय उद्योग समुदाय और मध्यप्रदेश के बीच के सेतु को मजबूत करेगा। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के ‘आउटरीच’ कार्यक्रमों से न केवल निवेश के नए रास्ते खुलेंगे, बल्कि मध्यप्रदेश की ‘औद्योगिक क्षमता’ को राष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान भी मिलेगी।

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