ईरानी द्वीप पर कब्ज़ा करने की तैयारी कर रहे हैं दुश्मन : स्पीकर

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नई दिल्ली। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर ग़ालिबाफ ने कहा है कि कुछ सूचनाएं यह संकेत देती हैं कि “दुश्मन” एक क्षेत्रीय देश के समर्थन से ईरान के एक द्वीप पर कब्ज़ा करने के लिए अभियान की तैयारी कर रहे हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “यदि वे एक कदम भी आगे बढ़ाते हैं, तो उस क्षेत्रीय देश की सभी महत्वपूर्ण अवसंरचनाएं (ईरान के) बिना किसी रोक-टोक के लगातार हमलों के दायरे में आ जाएंगी।”

दिन में पहले एक अलग पोस्ट में ग़ालिबाफ ने कहा कि ईरान क्षेत्र में अमेरिका की सभी गतिविधियों खासकर उसके सैनिकों की तैनाती पर करीबी नजर रख रहा है।

उन्होंने कहा, “जो जनरलों ने तोड़ा है, उसे सैनिक ठीक नहीं कर सकते बल्कि वे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भ्रम का शिकार होंगे,” और चेतावनी दी, हमारी भूमि की रक्षा के संकल्प को परखने की कोशिश न करें।

ग़ालिबाफ की यह टिप्पणी उन रिपोर्टों के बीच आई है, जिनमें कहा गया है कि पेंटागन अमेरिकी सेना की प्रतिष्ठित 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिकों को मध्य पूर्व भेजने की तैयारी कर रहा है।

इस बीच, अमेरिका ने कहा है कि वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने और वैश्विक तेल आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के प्रयास तेज कर रहा है क्योंकि ईरान के खिलाफ उसका सैन्य अभियान जारी है। व्हाइट हाउस ने कहा कि अभियान का फोकस वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों की रक्षा करना है।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने संवाददाताओं से कहा कि अमेरिकी बल ईरान की उस क्षमता को निशाना बना रहे हैं, जिससे वह इस रणनीतिक जलमार्ग के जरिए शिपिंग को खतरे में डाल सकता है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक अहम मार्ग है।

उन्होंने कहा, “हमारी सेना इस बात पर पूरी तरह केंद्रित है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के जरिए ऊर्जा के मुक्त प्रवाह के लिए मौजूद खतरे को खत्म किया जाए।”

इसी प्रयास के तहत, अमेरिकी बलों ने जलडमरूमध्य के तटवर्ती क्षेत्रों में ईरानी सैन्य ढांचे पर हमला किया।

28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान और ईरान के कई अन्य शहरों पर संयुक्त हमले किए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और नागरिकों की मौत हो गई थी।

इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों और संपत्तियों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों की लहर शुरू की।

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