रायसेन। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के ‘उन्नत कृषि महोत्सव 2026 – प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण’ के माध्यम से किसानों को देश के प्रतिष्ठित कृषि निष्कर्षों का लक्ष्य दिया जाएगा, वहीं पराली को ‘कचरे से कंचन’ (वेस्ट टू वेल्थ) बनाने की तकनीक और तीन दिन तक लगातार चलने वाली ट्रेनिंग-श्रृंखला किसानों की खेती को नई खेती पर ले जाएगी। कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि रायसेन में दशहरा मैदान पर होने वाले इस महोत्सव के दौरान केंद्रीय महोत्सव के दौरान तीन दिवसीय चार स्थान- समर्पण हॉल-1, संरक्षण हॉल-2, अभिषेक हॉल-3 और मुख्य हॉल में विषय-आधारित सत्र होंगे, जिसमें कृषि प्रबंधन से लेकर बाजार और आधुनिक तकनीक तक पूरी श्रृंखला शामिल होगी।
उन्होंने बताया कि पहले दिन 11 अप्रैल को दो सत्रों में फसल कटाई के बाद प्रबंधन और कृषि अवसंरचना कोष के उपयोग से उन्नत कृषि, डिजिटल कृषि और कृत्रिम वैज्ञानिक आधारित समाधान, कृषि-आय से कृषि-आय में वृद्धि और कृषि मशीनीकरण के माध्यम से खेती में विकास जैसे विषय शामिल थे। साथ ही, दलहन एंटरप्राइजेज में प्लांटर्स ग्रोथ और एरिया विस्तार, प्राकृतिक खेती, प्लांटेशन प्लांट्स का विस्तार और परली मैनेजमेंट पर ‘वेस्ट-टू-वेल्थ (कचरे से कंचन)’ के साथ नुक्कड नाटक के माध्यम से किसानों को व्यावसायिक संदेश देंगे।
शिवराज सिंह ने बताया कि महोत्सव में पराली प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जाएगा, जहां ‘कचरे से कंचन’ की अवधारणा के तहत वेस्ट-टू-वेल्थ मॉडल के किसानों के बीच सामंजस्य बिठाया जाएगा ताकि पराली और कृषि-अपशिष्ट को शामिल करने की जगह पर भोजन, ऊर्जा और अतिरिक्त आय के स्रोत में बदलाव किया जा सके।
पराली प्रबंधन पर सत्र के साथ-साथ नुक्कड़ नाटक के माध्यम से पराली समापन से होने वाले नुकसान और वैज्ञानिक प्रबंधन से मिलने वाले आर्थिक लाभ को सरल और सहज रूप में शामिल किया जाएगा। कृषि मंत्रालय और वैज्ञानिक समूह द्वारा पराली प्रबंधन, फसल बीमा, सुरक्षित कीटनाशक उपयोग, प्राकृतिक खेती और ‘धरती बचाओ’ पर आधारित नुक्कड़ नाटकों की लिपि संस्कृति विभाग द्वारा बनाया गया है, जो मेले के दौरान अलग-अलग स्थानों पर नाट्य-प्रस्तुतियों के रूप में किसानों तक पहुंचता है। इन प्रस्तुतियों का उद्देश्य प्रौद्योगिकी वैज्ञानिकों को किसानों की भाषा में स्थायी परिवर्तन की दिशा में प्रेरित करना है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह के, मेले के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ‘वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन, उन्नत कृषि की विचारधारा’ को शामिल करने पर जोर देगी; किसानों द्वारा दिए गए मिट्टी के उपकरणों का परीक्षण करके स्वास्थ्य रिपोर्ट दी जाएगी, जिससे खेत-स्टार पर सही फसल और पोषक तत्व प्रबंधन की योजना बनेगी। साथ ही ग्राफ्टिंग, एडवांस्ड एसोसिएटेड मैनेजमेंट, सिलिकॉनपोनिक्स, हाई-टेक हॉर्टिकल्चर और एकीकृत कृषि प्रणाली के लाइव मॉडल को दर्शाया जाएगा ताकि किसान तकनीक इन को देखकर अपनी खेती में लागू कर सके।

