ईरान के खिलाफ ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ के इस्तेमाल पर विचार कर रहा अमेरिका: रिपोर्ट

Bomb

नई दिल्ली। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और संदिग्ध परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के लिए अपने हथियारों के जखीरे में मौजूद सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु हथियार GBU-43/B के इस्तेमाल की सैन्य योजनाओं पर विचार कर रहा है। अनौपचारिक रूप से ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ के नाम से मशहूर इस अति-विनाशकारी बम के इस्तेमाल के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम अनुमति होना अनिवार्य होगा।

लगभग 21,600 पाउंड (9.8 टन) वजनी यह निर्देशित बम अमेरिका के पास मौजूद सबसे बड़ा गैर-परमाणु हथियार है। यह जमीन से टकराने से ठीक पहले हवा में ही फटता है और लगभग नौ सिटी ब्लॉक्स (शहर के 9 चौराहों/मुहल्लों) के बराबर इलाके को पूरी तरह तबाह करने वाला तीव्र शॉकवेव (धमाका) पैदा करता है।

रिपोर्टों के मुताबिक, इस कदम पर मुख्य रूप से ईरान के नतांज के पास स्थित गहराई में बने संदिग्ध ‘पिकैक्स माउंटेन’ परमाणु परिसर और प्रमुख ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने और सैन्य दबाव बढ़ाने के लिए विचार किया जा रहा है।

इस महाविनाशकारी बम का युद्ध में केवल एक बार उपयोग किया गया है। इसे राष्ट्रपति ट्रंप के पिछले कार्यकाल के दौरान 13 अप्रैल 2017 को अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में आईएसआईएस (ISIS-K) के गुफा व सुरंग नेटवर्क को नष्ट करने के लिए गिराया गया था।

सामरिक विश्लेषकों और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि MOAB का सतह पर असर तो बहुत व्यापक और भयावह होता है, लेकिन जमीन या चट्टानों को चीरकर गहराई में जाने के लिए इसे डिजाइन नहीं किया गया है। ईरान के कई मुख्य परमाणु ठिकाने और बंकर पहाड़ों की गहराई में ठोस ग्रेनाइट चट्टानों के नीचे बने हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ियों के अंदर बहुत गहराई में स्थित ठिकानों को तबाह करने के लिए MOAB के बजाय GBU-57 MOP जैसे विशेष ‘बंकर बस्टर’ बम अधिक कारगर साबित होते हैं, जो जमीन के अंदर गहराई तक धंसने के बाद धमाका करते हैं। इसलिए, यदि अमेरिका MOAB का इस्तेमाल करता भी है, तो इससे सतह पर बड़े पैमाने पर विनाश और मनोवैज्ञानिक असर भले ही देखने को मिले, लेकिन गहराई में दबे रक्षा तंत्र को नष्ट करना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।

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