वैश्विक तनाव के बीच जैव ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: शक्तिकांत दास

Shaktikant

मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव और भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को कहा कि जैव ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन केंद्र सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे। उन्होंने कहा कि भारत बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक मजबूती को और मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।

मुंबई में आयोजित सीआईआई एनुअल बिजनेस समिट 2026 में बोलते हुए दास ने कहा कि भारत की मजबूती का आधार मजबूत आर्थिक स्थिरता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद सरकार की वित्तीय स्थिति और बैंकिंग व्यवस्था स्थिर बनी हुई है।

उन्होंने कहा, कॉरपोरेट कंपनियों की बैलेंस शीट अब पहले की तुलना में काफी मजबूत है, जिससे नए निवेश को समर्थन मिलेगा। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार सुधारों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस मामले में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा रही है।

हालांकि, दास ने चेतावनी दी कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और सप्लाई चेन में आ रही रुकावटें दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर भारी लागत का बोझ डालती रहेंगी।

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पश्चिम एशिया में जारी तनाव के आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए कई कदम अपनाने की अपील की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से कहा था कि जहां संभव हो, घर से काम करें, गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचें और एक साल तक विदेश यात्रा करने से परहेज करें।

उन्होंने नागरिकों से खाने के तेल, विदेशी उत्पादों और रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल को कम करने की भी अपील की थी।

इन उपायों को भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने और ईंधन आयात पर दबाव कम करने की बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी लोगों से घबराने की जरूरत नहीं होने की बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार मौजूदा वैश्विक हालात के असर को कम करने के लिए ठोस कदम उठा रही है।

राजनाथ सिंह ने सोमवार को मंत्रियों के अनौपचारिक सशक्त समूह की पांचवीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा सप्लाई चेन पर पड़ने वाले खतरे और देश में जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता की समीक्षा की गई।

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