यूएस-ईरान वार्ता में मदद को मास्को तैयार, लेकिन खुद को थोपेगा नहीं : रूसी उप विदेश मंत्री

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नई दिल्ली। रूसी उप विदेश मंत्री सर्गेई रॉबकॉफ ने कहा है कि मास्को ईरान और अमेरिका के बीच चल रही वार्ताओं में आवश्यक होने पर मदद करने के लिए तैयार है, लेकिन वह अपनी बातों को जबरन थोपने का इरादा नहीं रखता।

रॉबकॉफ ने एक इंटरव्यू में कहा, “रूस इस संघर्ष के समाधान में हर संभव मदद देने के लिए तैयार है, जो इसकी पार्टियों के लिए अच्छी तरह जाना-पहचाना है। साथ ही, हमने कभी अपनी सोच जबरन नहीं थोपीं और आगे भी थोपने का कोई इरादा नहीं है। लेकिन यदि उपयुक्त अनुरोध किया जाता है, तो हम मदद का हाथ बढ़ाएंगे।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मास्को हमेशा और आज भी “राजनीतिक और कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से ही समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध” रहा है। उनका मानना है कि किसी भी तरह के सैन्य या दबाव आधारित उपाय से स्थायी शांति स्थापित नहीं की जा सकती।

रॉबकॉफ ने अमेरिका और ईरान की ओर से वार्ता प्रक्रिया फिर से शुरू करने के प्रयासों का स्वागत किया।

ये बयान ऐसे समय में आया है जब बीजिंग में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मध्य पूर्व संकट को सुलझाना विश्व शांति के लिए जरूरी बताया। वहीं जिनपिंग ने तो एकाधिपत्य और जंगलराज तक की बात कही।

जिनपिंग ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा, “अगर लड़ाई नहीं रुकी तो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और वैश्विक स्थिरता पर बड़ा असर पड़ेगा।” उन्होंने कहा कि एकतरफा सैन्य कार्रवाई और लंबे समय तक चलने वाला युद्ध दुनिया को ऐसे दौर में ले जा सकता है, जहां अंतरराष्ट्रीय नियम कमजोर पड़ जाएं। ऐसी स्थिति में लड़ाई रोकना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा, “हम विश्व शासन की एक नई, अधिक तर्कसंगत और निष्पक्ष प्रणाली बनाने, दुनिया को समृद्धि की ओर ले जाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए तैयार हैं। दुनिया में बहुध्रुवीय व्यवस्था होनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों के नए तरीके अपनाए जाने चाहिए।”

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