नई दिल्ली। ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता और बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने शुक्रवार को राज्य में करीब 18 लाख लोगों को पिछले तीन महीनों से सामाजिक सुरक्षा पेंशन नहीं मिलने पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसे तकनीकी खामी के कारण हुई शासन व्यवस्था की गंभीर विफलता बताया।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को लिखे पत्र में पटनायक ने कहा कि प्रभावित लाभार्थी समाज के सबसे कमजोर वर्गों से आते हैं, जिनमें बुजुर्ग, विधवाएं और दिव्यांगजन शामिल हैं। इनमें से अधिकांश लोग अपने दैनिक खर्चों के लिए पूरी तरह इस पेंशन पर निर्भर हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार तीन महीनों तक इस महत्वपूर्ण सहायता से वंचित रहने के कारण राज्य के सबसे कमजोर नागरिकों को गंभीर परेशानी, अभाव और यहां तक कि भूखमरी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
गंजाम जिले के बेगुनियापाड़ा की सावित्री डोरा की कथित तौर पर पेंशन लाभ नहीं मिलने के बाद हुई मौत का उल्लेख करते हुए पटनायक ने कहा कि अपने सबसे कमजोर नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध राज्य में ऐसी स्थिति स्वीकार्य नहीं है।
पटनायक ने कहा, ”हैरानी की बात यह है कि यह लंबी देरी कथित तौर पर सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्या के कारण हुई है। यह सरकार की गंभीर लापरवाही और उसकी मूल जिम्मेदारी से पीछे हटने को दर्शाता है। लोगों के अधिकार तकनीकी विफलताओं के भरोसे नहीं छोड़े जा सकते।”
बीजद प्रमुख ने याद दिलाया कि बीजद सरकार के 24 वर्षों के कार्यकाल के दौरान हर महीने की 15 तारीख को ‘जन सेवा दिवस’ के रूप में नियमित रूप से पेंशन वितरित की जाती थी। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर पारदर्शी और मानवीय तरीके से लाभार्थियों को पेंशन दी जाती थी। यदि कोई पेंशनधारी आने में असमर्थ होता था तो अधिकारी उसके घर तक पेंशन पहुंचाते थे।
उन्होंने कहा, ”नागरिक केंद्रित इस व्यवस्था की व्यापक सराहना हुई थी और सुप्रीम कोर्ट ने भी इसकी प्रशंसा की थी। हमने पेंशन वितरण को पूरी तरह बैंक आधारित प्रणाली में बदलने के दबाव का लगातार विरोध किया, क्योंकि हमारी व्यवस्था समय पर भुगतान, व्यक्तिगत जवाबदेही और लाभार्थियों की गरिमा सुनिश्चित करती थी।”
पटनायक ने कहा कि सॉफ्टवेयर संबंधी समस्याओं के कारण पेंशन वितरण में आई यह लंबी देरी यह साबित करती है कि पिछली बीजद सरकार की व्यवस्था अधिक प्रभावी थी।
उन्होंने कहा, ”तीन महीने तक पेंशन का बंद रहना केवल प्रक्रियागत चूक नहीं है, बल्कि यह शासन व्यवस्था की गंभीर विफलता है। इसलिए मैं आपसे आग्रह करता हूं कि सभी लंबित पेंशन राशि का तत्काल मैन्युअल तरीके से भुगतान कराया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने। सरकार को इस चूक के लिए जिम्मेदारी भी तय करनी चाहिए और पेंशनधारकों को भरोसा दिलाना चाहिए कि उनके अधिकारों से भविष्य में कोई समझौता नहीं होगा।”
रिपोर्टों के अनुसार, पिछले तीन महीनों से लाभार्थियों के बैंक खातों में वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांग भत्ते की राशि नहीं पहुंची है, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

