मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का कदम, कारपूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के निर्देश

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भोपाल। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य की न्यायिक व्यवस्था में ईंधन की बचत को बढ़ावा देने के लिए कई नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों, कोर्ट स्टाफ और वकीलों से अपील की है कि वे कारपूलिंग, सार्वजनिक परिवहन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सुविधाओं का अधिक से अधिक उपयोग करें, ताकि अदालत के कामकाज पर कोई असर न पड़े।

ये निर्देश बुधवार को रजिस्ट्रार जनरल द्वारा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर जारी किए गए। ये नियम जबलपुर स्थित मुख्य पीठ, इंदौर और ग्वालियर खंडपीठों सहित राज्य के सभी जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में लागू होंगे।

आदेश के अनुसार, अदालतों से जुड़े सरकारी वाहनों का उपयोग केवल न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों के लिए ही किया जाएगा। अधिकारियों को रूट के अनुसार परिवहन योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वाहनों का बेहतर उपयोग हो सके और अनावश्यक ईंधन खर्च कम किया जा सके।

उच्च न्यायालय ने कहा है कि विशेष परिस्थितियों जैसे आपात स्थिति, सुरक्षा जरूरत, प्रोटोकॉल ड्यूटी या चिकित्सा आवश्यकता को छोड़कर अलग वाहन सुविधा नहीं दी जाएगी।

वकीलों और कर्मचारियों को भी सलाह दी गई है कि वे संभव होने पर सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग और दोपहिया वाहन साझा करने की व्यवस्था अपनाएं। जिन मार्गों पर अधिक यात्री रहते हैं, वहां मिनी बस और ट्रैवलर वैन जैसी साझा परिवहन सुविधाओं के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया गया है।

इसके साथ ही तकनीक के अधिक उपयोग पर जोर देते हुए कोर्ट ने कहा है कि जहां संभव हो, वकील वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बहस करें और प्रशासनिक बैठकें वर्चुअल माध्यम से की जाएं।

निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए रजिस्ट्री को सरकारी वाहनों के ईंधन उपयोग की दैनिक निगरानी करने के निर्देश भी दिए गए हैं। वाहनों का उपयोग काम की जरूरत और प्राथमिकता के आधार पर तय किया जाएगा तथा समय-समय पर समीक्षा भी की जाएगी।

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था अस्थायी है और इसका उद्देश्य देश में ईंधन संरक्षण को बढ़ावा देना है, साथ ही न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों को बिना बाधा के सुचारू रूप से चलाना भी सुनिश्चित करना है।

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