राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा नीति में बदलाव का दिया संकेत

Donald

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को लेकर बड़ा संकेत देते हुए कहा कि अब यह द्वीपीय देश हमारी ओर आ रहा है। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि उनका इशारा किस बदलाव की ओर था और न ही क्यूबा को लेकर किसी नई अमेरिकी नीति का ऐलान किया।

बुधवार (स्थानीय समय) को नॉर्थ डकोटा के मेडोरा में थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए ट्रंप ने यह टिप्पणी की।

उनका यह बयान उस समय आया, जब वह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट की विदेश नीति और पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा कर रहे थे।

अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा, “क्यूबा की बात करें तो कई दशकों बाद अब वह हमारी ओर आ रहा है।” हालांकि उन्होंने इसके आगे कोई विस्तार नहीं दिया और यह भी नहीं बताया कि क्यूबा के साथ अमेरिका के संबंधों में किस तरह का बदलाव संभव है।

ट्रंप ने यह टिप्पणी थियोडोर रूजवेल्ट की विदेश नीति की सराहना करते हुए की। उन्होंने कहा कि रूजवेल्ट के दौर में अमेरिका ने पनामा नहर के निर्माण और स्पेन-अमेरिका युद्ध के बाद दुनिया में अपना प्रभाव काफी बढ़ाया था।

उन्होंने याद दिलाया कि उस युद्ध के बाद स्पेन ने क्यूबा, गुआम, फिलीपींस और प्यूर्टो रिको पर अपना नियंत्रण छोड़ दिया था। इसके तुरंत बाद ट्रंप ने क्यूबा के हमारी ओर आने वाली टिप्पणी की।

हालांकि कार्यक्रम का मुख्य विषय थियोडोर रूजवेल्ट की विरासत था, लेकिन ट्रंप ने अपने भाषण में पनामा नहर, ईरान, आव्रजन (इमिग्रेशन), अमेरिकी अर्थव्यवस्था और अमेरिका की 250वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ जैसे कई मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।

बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से क्यूबा के प्रति अमेरिका की सख्त नीति के समर्थक रहे हैं। अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के उस प्रयास को पलट दिया था, जिसका उद्देश्य वाशिंगटन और हवाना के बीच सामान्य संबंध स्थापित करना था।

ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंधों को और कड़ा किया, यात्रा संबंधी नियमों को सख्त बनाया और कम्युनिस्ट शासन वाले इस देश के साथ वित्तीय लेन-देन पर अतिरिक्त पाबंदियां भी लगाई थीं।

1959 की क्यूबा क्रांति के बाद से अमेरिका और क्यूबा के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। हालांकि, 2015 में पांच दशक से अधिक समय बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध बहाल हुए थे। इसके बावजूद अलग-अलग अमेरिकी प्रशासन के दौरान दोनों देशों के संबंधों में उतार-चढ़ाव बना रहा। आज भी आर्थिक प्रतिबंध, प्रवासन और क्षेत्रीय सुरक्षा दोनों देशों के संबंधों के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

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