भोपाल। मध्यप्रदेश की कांग्रेस ने कैग रिपोर्ट को लेकर सरकार पर जमकर हमला बोला है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा सरकारें अपने विकास का प्रमाण विज्ञापनों से नहीं, आंकड़ों से देती हैं! और जब आंकड़े नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के हों, तो वे किसी विपक्ष के आरोप नहीं, सरकार के कामकाज का आईना होते हैं!
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने सीएम डॉ मोहन यादव को एक पत्र लिखा, इस पत्र में पटवारी ने कहा कैग रिपोर्ट ने फिर एक आईना मध्य प्रदेश के सामने रख दिया है। इस आईने में फिर एक भयावह तस्वीर दिखाई देती है! देश में सबसे अधिक मातृ मृत्यु दर, सबसे अधिक शिशु मृत्यु दर, हजारों गांव बिना आंगनवाड़ी, लाखों बच्चे और गर्भवती महिलाएं पोषण से वंचित, आधे से अधिक जिम्मेदार पद खाली, अपंजीकृत समूहों के भरोसे बच्चों का भोजन और करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जवाबदेही गायब।
कांग्रेस नेता ने कहा यह प्रशासनिक विफलता नहीं, उस मां के विश्वास की हत्या है, जो सरकारी अस्पताल में सुरक्षित प्रसव का सपना लेकर जाती है। यह उस नवजात के अधिकार का अपमान है, जिसे जीवन की पहली लड़ाई ही सरकारी लापरवाही से लड़नी पड़ रही है! उन्होंने सरकार पर झूठें दावे करना का आरोप भी लगाया है।
पटवारी ने कहा आपकी सरकार दावा करती है कि मध्य प्रदेश विकास की दौड़ में आगे है, लेकिन कैग कह रहा है कि माताओं और बच्चों की सुरक्षा की दौड़ में मध्य प्रदेश सबसे पीछे खड़ा है। यह विरोधाभास नहीं, आपकी सरकार की प्राथमिकताओं का निर्वस्त्र चरित्र है! आपके शासन में करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन हजारों गांवों तक आंगनवाड़ी नहीं पहुंची। योजनाएं बनीं, लेकिन रसोई नहीं बनी। पोषण का बजट आया, लेकिन लाखों बच्चों की थाली खाली रह गई। रिकॉर्ड बनाए गए, लेकिन जिन बच्चों को भोजन नहीं मिला, उनका कारण तक दर्ज नहीं किया गया। क्या मोदीजी के नए भारत का यही सुशासन है?
इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री से कुछ मामलों में मंथन करने की अपील भी की है, कांग्रेस प्रेसिडेंट ने अपने पत्र में आगे कहा जिस प्रदेश में एक मां प्रसव के समय अपनी जान को लेकर आश्वस्त न हो, जिस प्रदेश में एक नवजात का जीवित रहना व्यवस्था की क्षमता पर नहीं, किस्मत पर निर्भर हो जाए, वहां सरकार को उत्सव नहीं, आत्ममंथन करना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने कुछ मामलों को लेकर कहा संकीर्ण सोच और बदले की राजनीतिक प्रवृत्ति और प्रकृति में अच्छा-बुरा फिर भी संभल जाता है, लेकिन एक मां की मौत और एक बच्चे की असमय बुझी सांस कभी वापस नहीं आती! मध्य प्रदेश की जनता अब यह जानना चाहती है कि आपकी सरकार के लिए अधिक महत्वपूर्ण क्या है, विज्ञापनों की चमक या माताओं की सुरक्षा? समारोहों की भीड़ या नवजातों की जिंदगी? पटवारी ने इन सभी सवालों को लेकर कहा, इस प्रश्न का उत्तर अब भाषणों से नहीं, कार्रवाई से दीजिए!

