भारतीय मूल के बुजुर्ग और पाकिस्तान के एक शख्स की अमेरिकी नागरिकता खत्म करने की मांग, मामला कोर्ट पहुंचा

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नई दिल्ली। अमेरिका सरकार भारतीय मूल के बुजुर्ग और पाकिस्तान के एक शख्स की अमेरिकी नागरिकता रद्द कराने की कोशिश कर रही है। आरोप है कि उन्होंने पहचान छुपाकर अमेरिका की नागरिकता हासिल की थी।

अमेरिकी न्याय विभाग ने सोमवार को बताया कि उसने डेलावेयर राज्य की एक अदालत से 59 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक जिया मुराद भट्टी की नागरिकता समाप्त करने का अनुरोध किया है। भट्टी ने 1992 में ‘रजा मुराद’ नाम का इस्तेमाल कर अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश किया था। इसके बाद उन्हें देश छोड़ने का आदेश भी दिया गया था। हालांकि उसने फर्जी पहचान और दस्तावेजों का उपयोग कर बाद में अमेरिकी नागरिकता प्राप्त कर ली। मामले की सुनवाई डेलावेयर की अदालत में की जाएगी।

अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालती शिकायत में भट्टी पर झूठी गवाही, तथ्यों को छिपाने, जानबूझकर गलत जानकारी देने और फर्जी बयान देने के आरोप लगाए हैं। भट्टी उन 25 लोगों में शामिल हैं, जिनकी अमेरिकी नागरिकता रद्द कराने की मांग सरकार ने की है। हालांकि, इनमें से कई अन्य लोगों पर हत्या के प्रयास और नाबालिग के यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराधों के आरोप भी हैं।

एक अलग मामले में अमेरिकी न्याय विभाग ने भारतीय मूल के 65 वर्षीय नरेंद्र सिंह की नागरिकता रद्द करने की भी मांग की है। आरोप है कि उन्होंने 1996 से अमेरिका में प्रवेश और प्रवास के दौरान दो अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल किया और बाद में वर्ष 2008 में अमेरिकी नागरिकता हासिल कर ली।

अदालत में दायर शिकायत के अनुसार नरेंद्र सिंह ने कई मौकों पर गलत जानकारी दी और ऐसे गैरकानूनी कार्य किए, जो उनके “नैतिक चरित्र” पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। न्याय विभाग का कहना है कि यही कारण उनकी अमेरिकी नागरिकता समाप्त करने के लिए पर्याप्त आधार है।

कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने कहा, “आज दायर किए गए मामले न्याय विभाग के इतिहास में नागरिकता रद्द करने के लिए सबसे बड़े समन्वित प्रयास का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन यह केवल शुरुआत है।”

इससे पहले जुलाई में पाकिस्तान मूल के 65 वर्षीय मुर्तजा अली पर भी अमेरिका में आव्रजन लाभ प्राप्त करने के लिए कई अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया था। वह उन 10 प्राकृतिक रूप से नागरिकता प्राप्त लोगों में शामिल हैं, जिनकी नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई ट्रंप प्रशासन कर रहा है। प्रशासन इसे अमेरिकी इतिहास में नागरिकता निरस्तीकरण का सबसे बड़ा अभियान बता रहा है।

अदालती शिकायत के अनुसार, मुर्तजा अली ने स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) और बाद में अमेरिकी नागरिकता हासिल करने से पहले अलग-अलग नामों से कई आव्रजन आवेदन दाखिल किए थे। वर्ष 2009 में उन्होंने मोहम्मद इकबाल नाम से अमेरिकी नागरिकता प्राप्त की थी।

संघीय अधिकारियों ने बताया कि बाद में की गई फिंगरप्रिंट जांच में यह पता चला कि विभिन्न पहचान के तहत जमा किए गए सभी आवेदन एक ही व्यक्ति से जुड़े थे।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी आव्रजन नीति में अवैध प्रवासियों और अपराधियों को निर्वासित करने को प्रमुख प्राथमिकता बनाया है। न्याय विभाग के अनुसार, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत 20 जनवरी 2025 से होने के बाद से विभाग ने नागरिकता रद्द करने से जुड़े 123 दीवानी (सिविल) मामले दायर किए हैं, जो विभाग के रिकॉर्ड में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।

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