नई दिल्ली। बाल विवाह पर रोक लगाने और देश की बालिकाओं के अधिकारों को कानूनी व सामाजिक रूप से अधिक सशक्त बनाने की दिशा में भारत सरकार द्वारा किए जा रहे ठोस प्रयासों को वैश्विक स्तर पर भारी सराहना मिली है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने खुले तौर पर भारत की इन पहलों की प्रशंसा करते हुए इस बात पर जोर दिया है कि भारत ने यह साबित कर दिखाया है कि यदि समाज को लगातार प्रोत्साहित किया जाए और जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर जन-भागीदारी (कम्युनिटी पार्टिसिपेशन) सुनिश्चित की जाए, तो देश से कुप्रथाओं को जड़ से उखाड़कर एक सार्थक व सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
संयुक्त राष्ट्र की यह सराहना यह दर्शाती है कि भारत में बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उठाए जा रहे कदम अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतर रहे हैं और अन्य देशों के लिए एक मिसाल बन रहे हैं।
सामुदायिक भागीदारी की ताकत: रिपोर्ट और बयानों के अनुसार, केवल कानूनों के होने भर से बदलाव नहीं आता; जब तक गांव, शहर और स्थानीय समुदाय खुद आगे आकर बाल विवाह जैसी कुरीतियों का विरोध नहीं करते, तब तक असली परिवर्तन संभव नहीं है। भारत ने जन-जागरूकता अभियानों के जरिए इस मोर्चे पर बेहतरीन सफलता हासिल की है।
बालिकाओं का सशक्तिकरण: इस प्रशंसा से न केवल देश में बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और उनके बुनियादी अधिकारों को लेकर सरकारी और गैर-सरकारी योजनाओं को और अधिक बल मिलेगा, बल्कि समाज की सोच में भी सकारात्मक बदलाव आने की गति तेज होगी।

