नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की नवरत्न कंपनी ‘स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (SAIL) की छत्तीसगढ़ स्थित प्रमुख इकाई भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) को निजी हाथों में सौंपने या बेचने की अटकलों पर विराम लग गया है। संयंत्र प्रबंधन ने रविवार को आधिकारिक बयान जारी कर बिक्री और निजीकरण से जुड़ी खबरों को पूरी तरह “झूठा, निराधार और भ्रामक” करार देते हुए खारिज कर दिया।
राजनीतिक आरोप और विवाद का घटनाक्रमयह पूरा विवाद तब खड़ा हुआ जब छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि अदाणी समूह का एक प्रतिनिधिमंडल संयंत्र का निरीक्षण करने आने वाला है। कांग्रेस ने दावा किया कि केंद्र सरकार भिलाई इस्पात संयंत्र को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। इन दावों के बाद संयंत्र में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों, स्थानीय दुकानदारों और टाउनशिप निवासियों के बीच नौकरी की सुरक्षा और भत्तों को लेकर आशंकाएं पैदा हो गई थीं।
भ्रम की स्थिति को दूर करते हुए केंद्रीय इस्पात मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से इन दावों का तुरंत खंडन किया। इसके साथ ही प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की ‘फैक्ट चेक’ टीम ने भी मामले की जांच कर इन खबरों को पूरी तरह असत्य और बेबुनियाद घोषित किया।
भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन ने नागरिकों, कर्मचारियों और मीडिया से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अप्रमाणित स्रोतों पर फैल रही ऐसी अफवाहों पर कतई ध्यान न दें। प्रबंधन ने दोहराया कि बीएसपी छत्तीसगढ़ की पहचान और भारत के औद्योगिक विकास की रीढ़ है, और इसके भविष्य को लेकर फैलाई जा रही नकारात्मक खबरें पूरी तरह काल्पनिक हैं।

