नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी कार्रवाई के तहत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ी और सनसनीखेज कार्रवाई को अंजाम दिया है। सीबीआई की टीम ने शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय में तैनात दो अधिकारियों को 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद केंद्रीय जांच एजेंसियों के गलियारे में हड़कंप मच गया है।
गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों में पहला नाम प्रवर्तन अधिकारी दीपक कुमार का है, जो ईडी कार्यालय में महत्वपूर्ण मामलों की जांच प्रक्रिया से जुड़े थे।
दूसरे आरोपी की पहचान मुख्य आरक्षी मनोज द्विवेदी के रूप में हुई है। मनोज द्विवेदी मूल रूप से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान हैं और वे वर्तमान में प्रतिनियुक्ति पर ईडी में सेवाएं दे रहे थे।
सीबीआई को शिकायत मिली थी कि ईडी के ये अधिकारी एक मामले की जांच को दबाने और आरोपी को राहत देने के एवज में भारी-भरकम रिश्वत की मांग कर रहे हैं। शिकायत का भौतिक सत्यापन करने के बाद सीबीआई ने जाल बिछाया।
जैसे ही शिकायतकर्ता से 5 लाख रुपये की रिश्वत की पहली किश्त स्वीकार की गई, सीबीआई की टीम ने मौके पर दबिश देकर दोनों अधिकारियों को रंगे हाथों धर दबोचा।
गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई ने दोनों अधिकारियों के कार्यालय कक्षों और उनके निजी आवासों पर भी छापेमारी शुरू कर दी है, ताकि रिश्वतखोरी के इस नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य साक्ष्यों व संपत्तियों का पता लगाया जा सके।
इस कार्रवाई से यह साफ संदेश गया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत जांच एजेंसियां अपने ही तंत्र में छिपे काली भेड़ों पर भी सख्त कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगी।

