नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में भारतीय दवाओं की बढ़ती मांग के चलते देश के फार्मास्युटिकल क्षेत्र ने चालू वित्त वर्ष (2026-27) की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर 2026) में शानदार प्रदर्शन किया है। भारतीय दवा निर्यात संवर्धन परिषद द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत का कुल दवा निर्यात सालाना आधार पर करीब 4.90 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 16.14 अरब डॉलर (लगभग 16,135.93 मिलियन डॉलर) के स्तर पर पहुँच गया है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 15.38 अरब डॉलर रहा था।
यूरोप, आसियान और लातिन अमेरिका में जबरदस्त मांग: इस छमाही के दौरान यूरोपीय देशों, आसियान क्षेत्र और लातिन अमरीकी बाजारों से भारतीय दवाओं की रिकॉर्ड मांग देखी गई। आसियान देशों को निर्यात में 21.54 प्रतिशत और लातिन अमरीकी देशों को शिपमेंट में 16.58 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
अफ्रीकी देशों में भी भारतीय दवाओं का निर्यात 6.48 प्रतिशत बढ़ा है। हालांकि, अमेरिकी बाजार को भेजे जाने वाले शिपमेंट में थोड़ी सुस्ती देखी गई, लेकिन अन्य वैश्विक बाजारों ने इसकी भरपाई करते हुए कुल आंकड़े को मजबूत बढ़त दिलाई।
बल्क ड्रग्स और ड्रग इंटरमीडिएट्स में 12.07 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि सर्जिकल उत्पादों के निर्यात में भी 9.53 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई।
फार्मेक्सिल के अनुसार, भारत सरकार की दूरदर्शी नीतियों, उद्योग हितधारकों के सहयोग और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं के उत्पादन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का स्थान ‘दुनिया की फार्मेसी’ के रूप में और मजबूत हुआ है। भारतीय दवा कंपनियां आने वाले समय में अनुसंधान और नवाचार-आधारित विनिर्माण के जरिए वैश्विक अनुपालन मानकों को बनाए रखते हुए निर्यात की इस रफ्तार को और तेज करने के लिए तत्पर हैं।

