जम्मू-कश्मीर: श्रीनगर के सांसद रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और लोकसभा सदस्यता से दिया इस्तीफा

Resignation

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। श्रीनगर से लोकसभा सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्राथमिक सदस्यता और अपनी संसद की सीट दोनों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह बड़ा कदम अपने दिवंगत पिता और नेता आगा सैयद मेहदी की बरसी के अवसर पर बडगाम के ‘बेहिश्त-ए-जहरा पार्क’ में हजारों समर्थकों की मौजूदगी में उठाया। रुहुल्लाह के इस अचानक इस्तीफे से राज्य की सियासत और विशेष तौर पर उमर अब्दुल्ला सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है।

रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के शीर्ष नेतृत्व और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि पार्टी ने जनता से जो वादे किए थे, सत्ता में आने के बाद उनसे समझौता कर लिया गया है।

उनका मुख्य आरोप है कि चुनाव के दौरान पार्टी अनुच्छेद 370 की बहाली और जनता के अधिकारों की पुरजोर वकालत करती रही, लेकिन सरकार बनने के बाद नेतृत्व ने इस मुद्दे पर अपना रुख बदल लिया, जिसे वह कतई बर्दाश्त नहीं कर सकते।

रुहुल्लाह ने तंज कसते हुए कहा कि पार्टी ने दिल्ली के आगे और वैचारिक सिद्धांतों के साथ समझौता कर लिया है, ऐसे में वे इस राजनीतिक धोखे और दबे-कुचले माहौल का हिस्सा बनकर जनता के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहते।

लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देने पर रुहुल्लाह का कहना था कि चूंकि उन्होंने जनता के बीच जाकर एक खास जनादेश और वादे के तहत यह सीट जीती थी, और अब जब पार्टी उस रास्ते से भटक चुकी है, तो उन्हें इस पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

जानकारों का मानना है कि रुहुल्लाह मेहदी आने वाले समय में घाटी के असंतुष्ट और वैचारिक रूप से साफ-सुथरे युवाओं को जोड़कर एक नया राजनीतिक विकल्प या मंच खड़ा करने की तैयारी कर रहे हैं।

इस हाई-प्रोफाइल इस्तीफे के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है, हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का दावा है कि इससे सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। फिर भी, एक कद्दावर और जनसमर्थन वाले नेता के जाने से एनसी को बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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