नई दिल्ली। संयुक्त राज्य अमेरिका से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के आए शुरुआती और निर्णायक परिणामों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन पार्टी को करारा झटका लगा है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने शानदार वापसी करते हुए अमेरिकी संसद में बहुमत हासिल कर लिया है। इस चुनावी उलटफेर के बाद व्हाइट हाउस और अमेरिकी विधायी निकायों के बीच राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं, जिससे राष्ट्रपति ट्रंप के लिए अपने आगामी कार्यकाल के एजेंडे को लागू करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
कड़े मुकाबले के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस के निचले सदन में आवश्यक बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही संसद की कार्यप्रणाली और प्रमुख समितियों की कमान अब विपक्षी पार्टी के हाथों में आ गई है।
कई महत्वपूर्ण राज्यों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों को जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ा, जिसके कारण सीनेट में भी पार्टी की स्थिति कमजोर हुई है। हालांकि कुछ सीटों पर परिणाम बेहद करीबी रहे, लेकिन कुल मिलाकर रिपब्लिकन पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी।
अमेरिकी मतदाताओं के बीच इस बार महंगाई, बढ़ती जीवन लागत और अर्थव्यवस्था की स्थिति सबसे बड़ा मुद्दा रही। आम नागरिकों का एक बड़ा वर्ग सरकार की मौजूदा आर्थिक नीतियों से असंतुष्ट नजर आया।
चुनावों के दौरान फ्लोरिडा में मूसलाधार बारिश और बाढ़ के कारण मतदान केंद्रों के अचानक बदले जाने और न्यू यॉर्क समेत कई अन्य इलाकों में बैलेट स्कैनिंग मशीनों में आई तकनीकी गड़बड़ियों के कारण भी मतदाताओं में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी देखने को मिली।
अमेरिकी राजनीतिक परंपरा के अनुसार, मध्यावधि चुनावों को अक्सर मौजूदा राष्ट्रपति के शुरुआती दो वर्षों के कामकाज पर जनता का ‘जनमत संग्रह’ माना जाता है। इतिहास की तरह इस बार भी मतदाताओं ने राष्ट्रपति के खिलाफ अपना संदेश साफ कर दिया है।
संसद के दोनों सदनों या कम से कम एक सदन पर विपक्षी डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए अपने विवादास्पद फैसलों, कर सुधारों और बजट प्रस्तावों को बिना किसी रुकावट के पास कराना लगभग असंभव हो जाएगा।
अब डेमोक्रेटिक पार्टी के पास प्रशासन के निर्णयों की कड़ी संसदीय जांच करने की पूरी ताकत आ गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच तीखे टकराव और नीतिगत गतिरोध देखने को मिल सकते हैं, जिसका असर अमेरिकी और वैश्विक राजनीति दोनों पर पड़ेगा।

