भारतीय स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने टेस्ट क्रिकेट को कहा अलविदा, सोशल मीडिया पर शेयर किया भावुक संदेश

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नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी और घातक तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने रेड-बॉल क्रिकेट यानी टेस्ट फॉर्मेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। शमी के इस अचानक आए फैसले से उनके प्रशंसकों और पूरे क्रिकेट जगत में सुगबुगाहट और भावुक माहौल है। अपने 13 साल के शानदार और यादगार टेस्ट करियर को विराम देते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक नोट साझा किया है, जिसमें उन्होंने लिखा कि वह “सफेद जर्सी को अलविदा कह रहे हैं, लेकिन इससे जुड़ी यादों को कभी नहीं।”

संयोग देखिए कि ठीक 13 साल पहले, यानी 6 नवंबर 2013 को ही मोहम्मद शमी ने कोलकाता के ईडन गार्डन्स में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच खेलकर अंतरराष्ट्रीय रेड-बॉल क्रिकेट में कदम रखा था। ठीक उसी तारीख पर अपने संन्यास का ऐलान कर उन्होंने इस सफर को एक ऐतिहासिक पूर्ण विराम दिया है।

अपने 64 मैचों के टेस्ट करियर में शमी ने अपनी बेहतरीन सीम और स्विंग गेंदबाजी के दम पर कुल 229 विकेट चटकाए। इस दौरान उन्होंने 6 बार एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लेने का कारनामा किया। विदेशी पिचों (विशेषकर दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया) पर भारतीय जीत में उनकी गेंदबाजी की भूमिका बेहद अहम रही है। उनका आखिरी टेस्ट मुकाबला जून 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल था।

पिछले कुछ सालों में शमी को टखने की सर्जरी और घुटने की समस्याओं जैसी गंभीर चोटों का सामना करना पड़ा। हालांकि उन्होंने घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी) में बंगाल के लिए वापसी की कोशिश की, लेकिन लंबे 5 दिवसीय फॉर्मेट के भारी वर्कलोड और शरीर की फिटनेस को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह कड़ा फैसला लिया।

फैंस के लिए राहत की बात यह है कि शमी ने केवल टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया है। वह वनडे, टी20 फॉर्मेट और आईपीएल में अपनी गेंदबाजी का जलवा बिखेरना जारी रखेंगे, साथ ही फिटनेस बरकरार रखने के लिए जरूरत पड़ने पर घरेलू क्रिकेट में भी उपलब्ध रह सकते हैं।

अपने संन्यास संदेश में शमी ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड, बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन, अपने सभी कोचों, साथियों और देश-विदेश के करोड़ों प्रशंसकों का दिल से शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि देश के लिए टेस्ट जर्सी पहनना उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना और गौरव रहा है, और मैदान पर उनकी आखिरी गेंद भले ही फेंक दी गई हो, लेकिन भारत के लिए खेलने का जज्बा उनके दिल में हमेशा जिंदा रहेगा।

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