जॉर्डन ने हवाई हमले की कोशिश नाकाम की, दो ड्रोन किए ढेर

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नई दिल्ली। जॉर्डन की रॉयल जॉर्डनियन एयर फोर्स ने सोमवार सुबह देश को निशाना बनाने वाले दो ड्रोन को मार गिराया। जॉर्डन आर्म्ड फोर्सेज (जेएएफ) ने इसकी जानकारी दी। जेएएफ ने कहा कि ड्रोन को गिराने की कार्रवाई में किसी की मौत या कोई नुकसान नहीं हुआ।

समाचार एजेंसी स‍िन्हुआ के मुताबिक, रॉयल इंजीनियरिंग कॉर्प्स की टीमें उन जगहों पर भेजी गईं, जहां ड्रोन का मलबा गिरा था। टीमों ने तय तकनीकी और सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुसार उन इलाकों को सुरक्षित कर लिया।

जेएएफ ने कहा कि वह जॉर्डन के हवाई क्षेत्र पर लगातार नजर रख रहा है और देश की सुरक्षा तथा नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

इससे पहले शुक्रवार को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा था कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन के अल-अजराक एयर बेस पर ‘जोरदार’ हमला किया है। ईरान ने दावा किया कि इस हमले में कई अमेरिकी लड़ाकू विमानों को काफी नुकसान पहुंचा।

ईरान ने कहा कि बेस पर मौजूद अमेरिकी सैनिकों की बैरकों को भी निशाना बनाया गया, जिससे कुछ अमेरिकी कर्मियों की मौत हुई। गुरुवार को ईरान ने दावा किया था कि उसने अपनी जवाबी कार्रवाई के तहत कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और सैन्य संपत्तियों पर हमले किए, जिनमें सैन्यकर्मियों को नुकसान पहुंचा और भारी सैन्य नुकसान हुआ।

ईरानी सेना ने कहा कि उसने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मौजूद टर्मिनल हाई अल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (थाड) एंटी-मिसाइल सिस्टम, पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम, सी-रैम रडार सिस्टम और ईंधन भंडारण सुविधाओं को निशाना बनाया। ईरान के मुताबिक, उसने अमेरिकी हेलीकॉप्टरों के पुर्जों के एक बड़े गोदाम और हेलीकॉप्टरों की मरम्मत व रखरखाव के लिए इस्तेमाल होने वाले एक स्टोरेज साइलो को भी नष्ट कर दिया।

इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने कहा कि अमेरिका मध्यस्थों के जरिए ईरान के साथ संदेशों का आदान-प्रदान कर रहा है। ईरानी मीडिया ने ऑस्ट्रियाई प्रसारक ओआरएफ को दिए उनके इंटरव्यू का हवाला देते हुए यह जानकारी दी।

बघेई ने कहा कि किसी भी बातचीत की शुरुआत के लिए ‘सही माहौल’ तैयार करना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने इस माहौल को खराब कर दिया है। उन्होंने वॉशिंगटन पर ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) की ‘सभी शर्तों का व्यवहार में उल्लंघन’ करने का आरोप लगाया।

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