पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव कम कराने में चीन की कोशिशें फिर बेअसर: रिपोर्ट

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नई दिल्ली। चीन की पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सुलह कराने की कोशिशों को अब तक कोई खास सफलता नहीं मिली है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव और झड़पें लगातार जारी हैं।

द डिप्लोमैट की रिपोर्ट में कहा गया है, “कतर, सऊदी अरब, तुर्किये और चीन ने कई बार दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश की, लेकिन तनाव कम नहीं हो सका।”

अप्रैल के पहले हफ्ते में चीन की मध्यस्थता में उरुमकी में हुई बातचीत के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने हालात को और न बिगाड़ने पर सहमति जताई थी, लेकिन यह शांति सिर्फ कुछ हफ्तों तक ही रही। इसके बाद तालिबान के रेडियो ने बताया कि पाकिस्तान की ओर से किए गए एक तोपखाने के हमले में कुनार प्रांत का एक स्वास्थ्य केंद्र तबाह हो गया।

रिपोर्ट में कहा गया है, “जब पाकिस्तान और तालिबान के बीच लड़ाई जारी है, तब भी चीन इस विवाद को खत्म कराने की कोशिश कर रहा है। बीजिंग अब बातचीत के दूसरे दौर की तैयारी में लगा है। मई में अफगानिस्तान के लिए चीन के विशेष दूत, राजदूत यू शियाओयोंग ने अलग-अलग पाकिस्तान के अधिकारियों और तालिबान के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उरुमकी वार्ता के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की। चीन की कोशिशें उसके अपने क्षेत्रीय हितों को ध्यान में रखकर होती दिखती हैं, लेकिन मौजूदा हालात ऐसे हैं कि दोनों पक्षों की चिंताओं को समझते हुए ज्यादा ठोस और व्यावहारिक समाधान की जरूरत है। नहीं तो बातचीत का अगला दौर भी ठोस नतीजे देने में नाकाम रह सकता है।”

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच महीनों में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अलग-अलग इलाकों में 10 से ज्यादा हवाई हमले किए हैं।

अफगान मीडिया संस्थान टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों में 800 से ज्यादा आम नागरिक मारे गए या घायल हुए हैं। इन हमलों का निशाना खोस्त, पक्तिया, पकतीका, कुनार, काबुल, नंगरहार और कंधार जैसे कई अफगान प्रांत बने। आम लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा।

हमलों में रिहायशी घरों के अलावा अस्पताल, स्कूल और विश्वविद्यालय जैसी नागरिक सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “पाकिस्तान का ताजा हमला कराची में सिंध रेंजर्स की एक चौकी पर हुए बम और गोलीबारी के हमले के एक दिन बाद हुआ। पाकिस्तान की सेना ने कहा कि टीटीपी से अलग हुए संगठन जमात-उल-अहरार के लड़ाकों ने कराची के गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में रेंजर्स कैंप के मुख्य प्रवेश द्वार पर विस्फोट किया और फिर अर्धसैनिक बलों पर गोलीबारी शुरू कर दी।”

रिपोर्ट के अनुसार, यह कराची में हाल के वर्षों के सबसे बड़े हमलों में से एक है। इससे पहले 2024 में एक धमाके में चीनी नागरिकों के काफिले को निशाना बनाया गया था, जिसमें दो चीनी नागरिकों की मौत हो गई थी।

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