दिग्विजय सिंह की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’: रोजाना 15 KM पदयात्रा, EVM हैकिंग डेमो और SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

Digvijay

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह अपनी बहुचर्चित ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ के जरिए प्रदेश में एक बड़ा जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रहे हैं। विजयादशमी के पावन अवसर पर महाकाल की नगरी उज्जैन में शिवलिंग निर्माण, पूजन-अर्चन और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ इस यात्रा का औपचारिक शुभारंभ होगा। 21 अक्टूबर की सुबह से दिग्विजय सिंह रोजाना 15 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकलेंगे। उन्होंने इस यात्रा के संबंध में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पूर्व में ही सूचित कर दिया है, हालांकि राहुल गांधी के इस यात्रा में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने की फिलहाल कोई संभावना नहीं है।

पदयात्रा का प्रतिदिन का रूट और दिनचर्या प्लानयात्रा को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए प्रथम चरण का विस्तृत रूट प्लान तैयार कर लिया गया है।

पूरे दिन के सफर को दो प्रमुख सत्रों में विभाजित किया गया है:प्रथम सत्र (सुबह 8:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक):इस दौरान दिग्विजय सिंह लगभग 9 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी करेंगे।

यात्रा के दौरान हर 3 किलोमीटर पर अल्पविराम रखा जाएगा, जहाँ चाय-नाश्ते का प्रबंध होगा।

दोपहर 1 बजे प्रथम सत्र की समाप्ति के बाद भोजन और विश्राम का समय तय किया गया है।द्वितीय सत्र (दोपहर 3:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक):विश्राम के बाद दोपहर 3 बजे से पुनः पदयात्रा शुरू होगी, जो शाम 6 बजे तक चलेगी।

जिस गांव या पड़ाव स्थल पर रात्रि विश्राम होगा, वहां स्थानीय ग्रामीणों के साथ शाम को भजन-कीर्तन और धार्मिक समागम आयोजित किए जाएंगे।यात्रा आयोजकों का प्रयास रहेगा कि पड़ाव स्थलों पर रामलीला का मंचन भी किया जाए, ताकि सांस्कृतिक और सनातन परंपराओं से जुड़ाव बना रहे।

EVM पर बड़ा दावा और IIT विशेषज्ञों का डेमोराजनीतिक दृष्टिकोण से इस यात्रा का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर दिग्विजय सिंह का रुख है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर आरोप लगाया है कि EVM के जरिए वोटों में हेरफेरी और वोट चोरी संभव है। पूर्व मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा का समापन होने के बाद वे भारतीय

प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के तकनीकी विशेषज्ञों और साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से एक सार्वजनिक डेमो पेश करेंगे। इस प्रदर्शन के जरिए वे मीडिया और जनता के सामने यह सिद्ध करने का प्रयास करेंगे कि किस तरह सॉफ्टवेयर और तकनीकी स्तर पर ईवीएम में गड़बड़ी की जा सकती है।

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