नई दिल्ली। खाड़ी देश सऊदी अरब में दो बांग्लादेशी नागरिकों को दी गई सजा-ए-मौत (मृत्युदंड) के मामले ने कूटनीतिक तूल पकड़ लिया है। सऊदी अरब के पवित्र मक्का क्षेत्र में अपने नागरिकों को बिना किसी पूर्व आधिकारिक सूचना के मृत्युदंड दिए जाने के बाद बांग्लादेश सरकार ने इस पर गहरी चिंता और कड़ी आपत्ति जताई है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने ढाका स्थित सऊदी राजदूत को राजनयिक नोट सौंपने के साथ-साथ जेद्दा स्थित अपने वाणिज्य दूतावास के जरिए पूरी कानूनी प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा मांगा है।
बांग्लादेश ने सऊदी अधिकारियों से दोनों नागरिकों के खिलाफ दायर किए गए सटीक आरोपों, मामले में अदालत द्वारा सुनाए गए अंतिम फैसलों की प्रतियों और जांच रिपोर्टों की मांग की है।
ढाका ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या अदालती कार्यवाही के दौरान आरोपियों को अपनी सफाई में वकील रखने (विधिक सहायता) की अनुमति दी गई थी और क्या उन्हें ऊपरी अदालत में अपील करने का अवसर मिला था।
बांग्लादेश सरकार ने विशेष रूप से यह सवाल उठाया है कि मृत्युदंड देने या सजा तामील करने की विधि (तरीके) को लेकर बांग्लादेशी दूतावास को समय रहते सूचित क्यों नहीं किया गया।
सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के अनुसार, मक्का स्थित एक मस्जिद परिसर के भीतर कथित तौर पर ‘अनैतिक/मर्यादाहीन कृत्य’ करने के आरोप में दो बांग्लादेशी नागरिकों (नजरूल इस्लाम अब्दुल बशीर और सीती/स्वीटी अख्तर) को हिरासत में लिया गया था और बाद में दोषी ठहराते हुए उन्हें मृत्युदंड दे दिया गया। हालांकि, स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी पक्ष द्वारा पहले साझा की गई कैदियों की सूची में सजा-ए-मौत का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था।
इस घटना के बाद से बांग्लादेशी प्रवासियों और मानवाधिकार संगठनों के बीच विदेश में काम कर रहे बांग्लादेशी श्रमिकों के कानूनी अधिकारों व सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। बांग्लादेश का कहना है कि वे अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सऊदी अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर पारदर्शी बातचीत और औपचारिक जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

