भोपाल। मध्य प्रदेश को देश का ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने और राज्य में दुग्ध उत्पादन में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हासिल करने के उद्देश्य से मोहन यादव सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। प्रदेश में उन्नत नस्ल के पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ‘गोपालकृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना’ लेकर आई है। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश भर के चयनित 313 ‘वृंदावन गांवों’ से सर्वश्रेष्ठ दुग्ध उत्पादन करने वाले कुल 939 गौपालकों को चुनकर उन्हें 25 हजार रुपए से लेकर 1 लाख रुपए तक की नकद पुरस्कार राशि से सम्मानित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा घोषित इस प्रोत्साहन योजना का मुख्य ध्येय राज्य में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के सहयोग से दूध संकलन को बढ़ाना और पशुपालकों की आय में वृद्धि करना है।
इस प्रतियोगिता में केवल वही पशुपालक भाग ले सकते हैं जिनकी गाय का न्यूनतम दैनिक दूध उत्पादन 6 लीटर या उससे अधिक है। प्रथम स्थान (सबसे अधिक दूध देने वाली गाय): 1 लाख रुपए का पुरस्कार, 25 हजार रुपए का पुरस्कार। राज्य के सभी 313 ब्लॉक से एक-एक ऐसे गांव को ‘वृंदावन गांव’ का दर्जा दिया गया है, जहां की कुल जनसंख्या कम से कम 2,000 हो और गांव में न्यूनतम 500 गोवंश मौजूद हों।
विजेताओं के निष्पक्ष चयन के लिए प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर दो दिवसीय दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जिसके लिए सरकार प्रति ब्लॉक ₹50,000 का अलग से बजट आवंटित करेगी।
सबसे अधिक दूध उत्पादन का दावा करने वाले पंजीकृत पशुपालकों को अपनी गायों के साथ निर्धारित प्रतियोगिता स्थल पर आमंत्रित किया जाएगा।
दो दिनों तक पशुपालन विभाग की देखरेख में गायों के रहने, खाने और पानी की निश्शुल्क व्यवस्था की जाएगी।
विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रत्यक्ष उपस्थिति में गायों से दूध निकाला जाएगा और सटीक नाप के आधार पर मैरिट सूची तैयार कर पुरस्कार विजेताओं का फैसला किया जाएगा।

