एस. जयशंकर का मंगोलिया दौरा: राष्ट्रपति, संसद अध्यक्ष से मुलाकात कर क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर की सार्थक चर्चा

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नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दो दिवसीय (22–23 जून 2026) मंगोलिया यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों समेत वैश्विक मुद्दों पर अपनी समकक्ष बी बत्त्सेत्सेग और राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना संग गहन विचार विमर्श किया। यह यात्रा बत्त्सेत्सेग के निमंत्रण पर हुई।

विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान जारी कर यात्रा के अहम पड़ावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान विदेश मंत्री ने मंगोलिया के विदेश मंत्री और कैबिनेट सचिवालय के प्रमुख बी. एन्खबयार के साथ विस्तृत वार्ता की। उन्होंने मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना से शिष्टाचार भेंट की, साथ ही संसद के अध्यक्ष एस. ब्याम्बात्सोग्त और शिक्षा मंत्री एल. एन्ख-अम्गालन से भी मुलाकात की।

इस दौरान दोनों पक्षों ने अक्टूबर 2025 में मंगोलिया के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के बाद द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की और भारत-मंगोलिया रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की।

वार्ता में विकासोन्मुख साझेदारी, व्यापार, शिक्षा, संस्कृति, क्षमता निर्माण, आपूर्ति शृंखला, खनन एवं महत्वपूर्ण खनिज, रक्षा, हवाई संपर्क और पीपल-टू-पीपल संबंधों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।

विदेश मंत्री ने मंगोलिया के अल्तानशिरी (डोर्नोगोवी प्रांत) में भारत के सहयोग से बन रहे तेल रिफाइनरी परियोजना स्थल का भी दौरा किया, जहां उन्हें परियोजना की प्रगति की जानकारी दी गई। यह दौरा मंगोलियाई विदेश मंत्री और उद्योग एवं खनिज संसाधन मंत्री गोंगोर डामडिनन्याम के साथ हुआ।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “विदेश मंत्री बत्त्सेत्सेग बटमुंख और उद्योग और खनन मंत्री गोंगोर दमदिन्नयम के साथ मंगोल रिफाइनरी प्रोजेक्ट की कंस्ट्रक्शन साइट का दौरा किया। यह लैंडमार्क भारत मंगोलिया फ्रेंडशिप प्रोजेक्ट लगातार आगे बढ़ रहा है। इसमें शामिल अलग-अलग टीमों के साथ चल रहे कामों की स्थिति का समीक्षा की।”

इसके अलावा, उन्होंने उलानबातर स्थित गंडनतेगचिनलेन मठ का भी दौरा किया, जो सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण स्थल है। जिसके बारे में उन्होंने एक्स पर लिखा, ” उलानबातर स्थित ऐतिहासिक गंडन मठ में श्रद्धांजलि अर्पित की। यह मठ भारत और मंगोलिया के बीच विशेष और आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक है।”

भारत की मदद से बौद्ध पांडुलिपि का डिजिटलीकरण होते देख प्रसन्न हुए और लिखा, “भारत-मंगोलिया साझेदारी के तहत एक मिलियन बौद्ध पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण की परियोजना पर काम होते देख प्रसन्नता हुई। भारत इस मठ को आगे भी निरंतर सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।”

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