भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में विकास और जनकल्याण से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और साइबर सुरक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों के लिए कुल 10,630 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों पर मुहर लगाई।
कैबिनेट ने मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) को 12 प्रमुख मार्गों के निर्माण के लिए नाबार्ड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट असिस्टेंस (NIDA) के तहत 4,600 करोड़ रुपये का ऋण लेने की अनुमति दी। इस ऋण के लिए राज्य सरकार की ओर से गारंटी भी दी जाएगी। प्रस्तावित मार्गों में भोपाल-विदिशा, खलघाट-मनावर-मांगोद, मंदसौर-सीतामऊ, सीतामऊ-बसई-सुवासरा, पूर्वी भोपाल बायपास, नीमच-मनासा-रामपुरा झालावाड़, इंदौर-देपालपुर सहित कई सड़कें शामिल हैं।
इसके अलावा कैबिनेट ने 22 प्रमुख सड़कों का स्वामित्व एमपीआरडीसी को हस्तांतरित करने का फैसला लिया है। इसके बदले निगम का संचालक मंडल राज्य सरकार के पक्ष में अपनी अंश पूंजी यानी शेयर जारी करेगा।
कैबिनेट ने सिवनी-बालाघाट के 91.64 किलोमीटर लंबे मार्ग को 4-लेन और पेव्ड शोल्डर के साथ विकसित करने के लिए 3,960 करोड़ 9 लाख रुपये की मंजूरी दी। परियोजना को हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल के तहत पूरा किया जाएगा।
निर्माण लागत का 40 प्रतिशत यानी 704 करोड़ 38 लाख रुपये राज्य बजट से खर्च होगा, जबकि बाकी 60 प्रतिशत राशि 15 वर्षों तक छमाही एन्यूटी के रूप में दी जाएगी। भूमि अधिग्रहण, अन्य पूर्व-निर्माण कार्य और सुपरविजन चार्ज के लिए भी 501 करोड़ 16 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
यह सड़क सिवनी और बालाघाट को बेहतर कनेक्टिविटी देने के साथ नागपुर, गोंदिया और छत्तीसगढ़ से संपर्क मजबूत करेगी। इससे क्षेत्र के पर्यटन, खनिज, वन उत्पाद और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की 19 योजनाओं को वित्त वर्ष 2026 से 2031 तक जारी रखने के लिए 1,740 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इन योजनाओं का लाभ गरीब, निराश्रित, वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन, कन्या विवाह सहायता पाने वाले परिवारों, नशा पीड़ितों और ट्रांसजेंडर समुदाय समेत कमजोर वर्गों को मिलेगा।
उज्जैन स्थित मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के संचालन को मजबूत करने के लिए कुल 244 पदों और कर्मचारियों की स्वीकृति दी गई है। इनमें 154 नियमित, एक संविदा और 89 आउटसोर्स पद शामिल हैं।
इस विश्वविद्यालय के माध्यम से प्रदेश के छह संभागों के 31 जिलों में स्वास्थ्य विज्ञान से जुड़े संस्थानों की संबद्धता, निरीक्षण, परीक्षाओं और अन्य प्रशासनिक कार्यों को अधिक व्यवस्थित किया जा सकेगा।
राज्य कम्प्यूटर सिक्योरिटी इंसीडेंट-रिस्पांस ऑपरेशन सेंटर के संचालन के लिए वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 80 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इसके अलावा प्रशासनिक, तकनीकी, फॉरेंसिक, कंसल्टेंसी और एसओसी से जुड़े कार्यों के लिए 25 नए पदों पर करीब 3.99 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

