ईरान के साथ शांति समझौता बरकरार रखने के लिए अमेरिका पर दबाव बनाना जरूरी है: राष्ट्रपति पेजेश्कियन

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नई दिल्ली। ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री सैयद माजिद इब्न अल-रजा ने रविवार को कहा कि तेहरान अपने हर ‘दुश्मन’ की धमकी को गंभीर और वास्तविक मानता है। उन्होंने इन खतरों को सिर्फ मनोवैज्ञानिक दबाव या डराने की रणनीति मानने से इनकार किया।

अल-रेजा ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर पोस्‍ट क‍िया, “हम न तो हैरान हैं और न ही चुप बैठेंगे। हम हर खतरे को अपनी तैयारी बढ़ाने, अपनी रोकथाम क्षमता मजबूत करने और अपनी ताकत को और विकसित करने का आधार मानते हैं।”

स‍िन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, उन्होंने यह टिप्पणी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद की, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने फिलहाल ईरान पर नए हमले रोकने का फैसला किया है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ ऐसी सैन्य शक्ति और क्षमता के साथ पूरी तरह तैयार था, जैसी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नहीं देखी गई। हालांकि, उन्होंने कहा कि ईरान और कुछ अन्य मध्य-पूर्वी देशों के अनुरोध पर उन्होंने कार्रवाई रोक दी। ट्रंप के अनुसार, एक संभावित समझौते पर काम चल रहा है, जिसमें होर्मुज स्‍ट्रेट को तुरंत, पूरी तरह और स्थायी रूप से खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना शामिल होगा।

इससे पहले अमेरिकी मीडिया की कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि अमेरिका और इजरायल सप्ताहांत के दौरान ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले शुरू कर सकते हैं।

इजरायल के चैनल 12 न्यूज ने रविवार को रिपोर्ट दी कि ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कतर और अमेरिका की मध्यस्थता से तैयार एक समझौते को मंजूरी दे दी है। इस कथित समझौते के तहत जहाज ईरान के नियंत्रण वाले हिस्से से खाड़ी में प्रवेश करेंगे और ओमान के जलक्षेत्र से बाहर निकलेंगे।

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्स’ न्‍यूज ने ईरानी वार्ता टीम के करीबी एक सूत्र के हवाले से इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया।

फार्स ने एक सैन्य सूत्र के हवाले से कहा कि जब तक अमेरिका की ‘शत्रुतापूर्ण और दुर्भावनापूर्ण गतिविधियां’ जारी रहेंगी, तब तक होर्मुज स्‍ट्रेट बंद रहेगा। केवल उन्हीं जहाजों को आने-जाने की अनुमति होगी जो ईरान की ओर से तय किए गए मार्गों का उपयोग करेंगे और जिन्हें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना से अनुमति और समन्वय प्राप्त होगा।

सूत्र ने चेतावनी दी कि अन्य रास्ते सुरक्षित नहीं हैं। साथ ही उसने कहा कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को लेकर ईरान की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।

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