रेलवे काजीपेट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में अगले 5 वर्षों में 200 इंटरसिटी रेलगाड़ियों का निर्माण करेगा

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नई दिल्ली। भारतीय रेल की काजीपेट रेल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पूरी होने के कगार पर है। इसमें रेलवे अगले 5 वर्षों में 200 इंटरसिटी रेलगाड़ियों का निर्माण करेगा। यह जानकारी रेल मंत्रालय द्वारा गुरुवार को दी गई।

रेल मंत्रालय ने बयान में कहा कि भारतीय रेल की काजीपेट रेल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट करीब पूरी होने वाली है। यह बहुमुखी रेलवे रोलिंग स्टॉक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है। शुरुआत में, काजीपेट अगले 5 वर्षों में 200 इंटरसिटी रेलगाड़ियों का निर्माण करेगा।

मंत्रालय ने आगे कहा कि काजीपेट रेल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को चालू करने की योजनाओं की केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में समीक्षा की।

मंत्रालय के मुताबिक, इन रेलगाड़ियों को पूरे देश में कम दूरी की यात्रा के लिए तैनात किया जाएगा। इनके ठहराव (स्टॉप) बार-बार होंगे। ये रेलगाड़ियां आमतौर पर लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तय करेंगी। हर यात्रा में कई ठहराव होंगे, ताकि नागरिक कस्बों और शहरों के बीच आसानी से आवागमन कर सकें। चाहे वे आस-पास के कस्बों में उच्च शिक्षा के लिए आने जाने वाले विद्यार्थी हों, या अपने स्वास्थ्य और काम की ज़रूरतों के लिए यात्रा करने वाले आम लोग हों, ये रेलगाड़ियां उन सभी की सुविधा बढ़ाएंगी।

ये रेलगाड़ियां लोगों को इंटरसिटी यात्रा के लिए नया और किफायती विकल्प प्रदान करेंगी। ये इंटरसिटी रेलगाड़ियां शटल सेवाओं की तरह होंगी, जो देशभर में आस-पास के कस्बों को आपस में जोड़ेंगी। इन रेलगाड़ियों के उत्पादन के साथ, यह संभावना है कि सड़कों पर यात्रा करने वाला स्थानीय यातायात का बड़ा हिस्सा रेलवे की ओर स्थानांतरित हो जाएगा।

रेल मंत्रालय के मुताबिक, ये इंटरसिटी रेलगाड़ियां आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी। इन सुविधाओं में दरवाज़ों का अपने-आप बंद होना, बेहतर वेंटिलेशन और 20 कोचों की संरचना वाला सुरक्षित कोच डिज़ाइन शामिल हैं। हर कोच में दो शौचालय होंगे।

इसके अलावा, इन इंटरसिटी रेलगाड़ियों में झटके-रहित आधुनिक कपलर और बोगियां होंगी। इन रेलगाड़ियों को 130 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने के लिए डिज़ाइन किया जाएगा।

इन रेलगाड़ियों में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम भी होगा। इसका मतलब है कि जब ट्रेन ब्रेक लगाएगी, तो यह बिजली पैदा करने वाले जनरेटर की तरह काम करेगी और उस पैदा हुई बिजली को वापस ग्रिड में भेज देगी। इसलिए, यह ऊर्जा के मामले में बहुत कुशल है। यह परिवहन का अधिक पर्यावरण-अनुकूल तरीका है और सड़क परिवहन की तुलना में इससे कार्बन उत्सर्जन काफी कम होगा।

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