नई दिल्ली। उपग्रह संचार (सैटेलाइट कम्यूनिकेशन) के क्षेत्र में एलन मस्क की कंपनी ‘स्टारलिंक’ के भारत में प्रवेश और लाइसेंस प्रक्रिया को लेकर जारी चर्चाओं के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। शुक्रवार को जारी एक बयान में रिलायंस ने कहा कि वह प्रतिस्पर्धी बाजार से कतई नहीं डरती और देश में स्टारलिंक सहित सभी नए सेवा प्रदाताओं का स्वागत करती है। हालांकि, कंपनी ने यह बात विशेष रूप से रेखांकित की कि चाहे भारतीय कंपनी हो या विदेशी, हर खिलाड़ी को भारत के कानूनों, विनियमों और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा।
रिलायंस (जियो) ने कहा कि वर्ष 2016 में उसने भी बेहद प्रतिस्पर्धी भारतीय दूरसंचार बाजार में शून्य ग्राहकों के साथ प्रवेश किया था। कंपनी का मानना है कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से अंततः देश के उपभोक्ताओं को ही बेहतर सेवाएं और विकल्प मिलते हैं।
रिलायंस ने स्पष्ट किया कि भारतीय दूरसंचार विभाग (DoT) और सुरक्षा एजेंसियों के नियम सभी लाइसेंसधारकों के लिए एक समान हैं। रिलायंस जियो की अपनी सैटेलाइट इकाई को भी कमर्शियल स्पेक्ट्रम आवंटन और सेवाओं के लिए आवश्यक सुरक्षा स्वीकृतियों का इंतजार है।
भारत सरकार और दूरसंचार मंत्रालय ने यह पहले ही साफ कर दिया है कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने से पहले सभी ऑपरेटरों (जिसमें स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो शामिल हैं) को डेटा लोकलाइजेशन (डेटा भारत में रखने) और लीगल इंटरसेप्शन (सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी प्रणाली) से जुड़ी अनिवार्य शर्तों को पूरा करना होगा।

