नई दिल्ली। इज़राइल में 26वें नेसेट (संसदीय) चुनावों के वोटों की जारी गिनती के बीच देश में अगली सरकार के गठन को लेकर बड़ा राजनीतिक गतिरोध पैदा हो गया है। रिकॉर्ड तोड़ 77.7 प्रतिशत मतदान के बाद सामने आ रहे रुझानों और मतगणना के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला दक्षिणपंथी गठबंधन संसद में स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा छूने से चूक गया है। इससे देश में एक बार फिर राजनीतिक अनिश्चितता और गठबंधन बनाने की खींचतान शुरू हो गई है।
इज़राइली संसद में बहुमत से सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की आवश्यकता होती है। मतगणना के मौजूदा रुझानों के अनुसार सीटों का समीकरण कुछ इस प्रकार नजर आ रहा है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और उनके सहयोगी दलों को 53 सीटों पर जीत मिलने का अनुमान है। वे बहुमत के आंकड़े से 8 सीटें दूर हैं।
मुख्य विपक्षी नेता व पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन ‘याशर’ को 48 सीटें मिलती दिख रही हैं।
इस चुनाव में अरबी दलों (जॉइंट लिस्ट और राअम) ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 19 सीटों पर बढ़त बनाई है।
नेतन्याहू और आइजेनकोट, दोनों ही मुख्य धड़े अपने दम पर 61 सीटों का बहुमत जुटाने में नाकाम रहे हैं। ऐसे में 19 सीटें जीतने वाली अरबी पार्टियां और निर्दलीय/छोटे दल ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आ गए हैं। हालांकि, वैचारिक मतभेदों के कारण मुख्यधारा के यहूदी दलों के लिए इनके साथ खुला गठबंधन बनाना आसान नहीं है।
विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट ने स्पष्ट कर दिया है कि जनता बदलाव चाहती है और वे नेतन्याहू के साथ गठबंधन नहीं करेंगे।
वर्तमान में इजराइली रक्षा बल (IDF) के जवानों, राजनयिकों और अस्पतालों से आए विशेष वोटों की गिनती जारी है। दोनों ही खेमों को उम्मीद है कि अंतिम नतीजों में 1 से 2 सीटों का फेरबदल हो सकता है।
आगे क्या हो सकता है?इज़राइली संविधान के अनुसार, आधिकारिक अंतिम नतीजे आने के बाद राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग संसद के नेताओं से सलाह-मशविरा करेंगे और सबसे ज्यादा समर्थन जुटाने की क्षमता रखने वाले नेता को सरकार बनाने का न्योता देंगे। यदि आगामी कुछ हफ्तों की बातचीत के बाद भी कोई नेता 61 सदस्यों का समर्थन साबित नहीं कर पाता है, तो इज़राइल को एक बार फिर फिर से आम चुनावों की ओर जाना पड़ सकता है।

