इंदौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की इंदौर में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के समापन पर संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने देश के सांस्कृतिक और सामाजिक मुद्दों पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनाने का जो संकल्प लिया गया था, वह पूरा हो चुका है। अब अन्य धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों (जैसे काशी, मथुरा और भोजशाला) से जुड़े विषयों के लिए समाज को स्वयं आगे आना होगा।
होसबाले ने कहा कि काशी, मथुरा और अन्य स्थलों से संबंधित कई विषय वर्तमान में अदालतों में विचारधीन हैं। ऐसे में जो मामले न्यायपालिका के समक्ष हैं, उन्हें कानून और न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही रहने देना चाहिए तथा सभी को अदालत के फैसले और न्यायिक मर्यादा का सम्मान करना चाहिए।
संघ सरकार्यवाह ने रेखांकित किया कि धार्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के कार्यों में केवल एक संगठन पर निर्भर रहने के बजाय पूरे समाज की सक्रिय सहभागिता और जागरूकता आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक समाज में सामाजिक और शैक्षणिक असमानता मौजूद है, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। इसे वोट बैंक की राजनीति का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि इसका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुँचना चाहिए।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मृत व्यक्तियों और दोहरी प्रविष्टि वाले नामों को सूची से हटाना देश की लोकतांत्रिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। इस प्रक्रिया पर बेवजह की राजनीति नहीं की जानी चाहिए।
देश के युवाओं और ‘जेन-जी’ आंदोलनों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि समाज में शांति और लोकतांत्रिक माध्यमों से ही बदलाव संभव है। युवाओं की जायज मांगों को प्रशासनिक स्तर पर हल किया जाना चाहिए और उनसे सतत संवाद बनाए रखने की जरूरत है।

