नई दिल्ली। दक्षिण-पूर्व एशियाई देश इंडोनेशिया में राष्ट्रपति और अन्य कई प्रमुख हस्तियों की जासूसी का एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। देश के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और कई अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हस्तियों के फोन नंबरों की अवैध तरीके से फोन टैपिंग (अनधिकृत इंटरसेप्शन) करने के आरोप में पुलिस विभाग के तीन वरिष्ठ जनरलों को हिरासत में लिया गया है। इस घटना के बाद से इंडोनेशिया के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
पुलिस की आपराधिक जांच एजेंसी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, तीनों पुलिस जनरलों पर बिना किसी आधिकारिक लिखित आदेश या कानूनी मंजूरी के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और अन्य प्रमुख राजनेताओं, अधिकारियों तथा कारोबारियों के फोन नंबरों की निगरानी और जासूसी (फोन टैपिंग) करने के पुख्ता आरोप हैं।
जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपियों ने जासूसी की प्रक्रिया को छिपाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को हटाने और डेटा डिलीट करने की कोशिश की। इसके बाद उनके खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक्स सूचना एवं लेन-देन कानून और देश की आपराधिक संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। दोषी पाए जाने पर आरोपियों को 10 साल तक की जेल की सजा हो सकती है।
इंडोनेशियाई अधिकारियों ने इस अनधिकृत निगरानी को राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की संप्रभुता के लिए एक बड़ा खतरा करार दिया है। सरकार का कहना है कि राष्ट्राध्यक्ष के फोन में बेहद संवेदनशील और रणनीतिक जानकारियां होती हैं, जिनका लीक होना देश के हितों को नुकसान पहुँचा सकता है।
राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है। हालांकि, इंडोनेशियाई न्याय एवं सुरक्षा मंत्रालय ने फिलहाल इसमें किसी देशद्रोह की साजिश से इनकार किया है, लेकिन यह जांच जारी है कि इस फोन टैपिंग के पीछे का मुख्य मकसद क्या था और यह किसके इशारे पर की जा रही थी।

