नई दिल्ली। सशस्त्र बलों में युवाओं की भर्ती के लिए शुरू की गई अग्निपथ योजना को लेकर केंद्र सरकार ने दीपावली के अवसर पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में अग्निवीरों की सेवा अवधि में बदलाव को मंजूरी दे दी गई है। नए संशोधन के तहत अग्निवीरों को मूल 4 साल के कार्यकाल के बाद 2 साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार दिया जाएगा, जिससे उनके कुल सेवा का कार्यकाल बढ़कर 6 साल तक हो सकेगा।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि यह फैसला थल सेना, नौसेना और वायु सेना में पहले बैच के अग्निवीरों का 4 साल का कार्यकाल पूरा होने से ठीक पहले लिया गया है।
अग्निपथ योजना के मूल ढांचे के तहत 4 साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही स्थायी/नियमित कैडर में शामिल करने का प्रावधान था, जबकि 75 प्रतिशत को सेवा से बाहर होना पड़ता था। नए फैसले के अनुसार, अब बाहर होने वाले इन 75 प्रतिशत अग्निवीरों को 2 साल की अतिरिक्त सेवा का विकल्प दिया जाएगा।
दो साल का यह अतिरिक्त कार्यकाल (‘सेकंड टूर ऑफ ड्यूटी’) स्वैच्छिक होगा। यदि अग्निवीर सेना में बने रहना चाहते हैं, तो वे अपनी सहमति और सेना के निर्धारित मूल्यांकन मानदंडों को पूरा करके 6 साल तक सेवा जारी रख सकेंगे।
सेवा विस्तार की इस अवधि के दौरान अग्निवीरों को पहले 4 वर्षों की तुलना में अधिक वेतन, बढ़ा हुआ भत्ता और अन्य सेवा लाभ दिए जाएंगे।
6 साल का कुल कार्यकाल पूरा करने के बाद अग्निवीरों को प्रदर्शन और सशस्त्र बलों के मानकों के आधार पर एक बार फिर नियमित कैडर में भर्ती के लिए विचार किया जाएगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे सशस्त्र बलों को और अधिक युवा, कुशल एवं आधुनिक युद्ध प्रणाली के लिए तैयार करने की दिशा में एक अहम सुधार बताया है। सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों द्वारा अग्निवीरों की कार्यकुशलता और अनुशासन पर दिए गए सकारात्मक फीडबैक के बाद यह कदम उठाया गया है।
इस फैसले से न केवल हजारों अग्निवीरों को लंबे समय तक देश सेवा और रोजगार का अवसर मिलेगा, बल्कि सेना को भी प्रशिक्षित एवं अनुभवी जवानों की निरंतरता हासिल होगी।

