नई दिल्ली। यूरोप के कई देशों के विमानन क्षेत्र और सुरक्षा एजेंसियों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक साथ महाद्वीप के विभिन्न हिस्सों में कुल 27 से अधिक यात्री उड़ानों को बम से उड़ाने की गंभीर धमकियां मिलीं। इन धमकियों के मिलने के तुरंत बाद यूरोपीय देशों के प्रमुख हवाई अड्डों पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई आपातकालीन कदम उठाने पड़े। हालांकि, सुरक्षा बलों और बम निरोधक दस्तों द्वारा गहन छानबीन और तलाशी अभियान चलाने के बाद राहत की सांस ली गई, क्योंकि ये सभी धमकियां पूरी तरह से झूठी और अफवाह साबित हुईं।
जैसे ही उड़ानों को बम से उड़ाने की धमकियां एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और संबंधित एयरलाइंस को मिलीं, विमानों को सुरक्षित स्थानों पर उतारा गया या उड़ान भरने से रोक दिया गया। यात्रियों और उनके सामान की सघन सुरक्षा जांच की गई।
अचानक उठे इस सुरक्षा संकट के कारण कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों के शेड्यूल में भारी देरी हुई, जिससे यूरोप के विभिन्न एयरपोर्ट्स पर यात्रियों को लंबी प्रतीक्षा और भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
पिछले कुछ समय से वैश्विक स्तर पर उड़ानों और बड़े सार्वजनिक स्थलों को निशाना बनाकर फर्जी धमकियां भेजने के मामलों में काफी उछाल आया है।
यूरोपीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने इस मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है ताकि इन अफवाहों के पीछे छिपे असामाजिक तत्वों या गिरोहों की पहचान की जा सके। विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की झूठी धमकियां न केवल एयरलाइंस को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन व्यवस्था और यात्रियों की मानसिक शांति को भी बुरी तरह प्रभावित करती हैं।

