मध्य प्रदेश में सफाई व्यवस्था चरमराई, भोपाल और हरदा समेत कई जिलों में सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन काम बंद हड़ताल

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भोपाल। मध्य प्रदेश में दीपावली के पावन त्योहार और स्वच्छता अभियानों के बीच राज्य भर के नगरीय निकायों के दैनिक वेतनभोगी और संविदा सफाई कर्मचारियों ने अपनी लंबित 18 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन काम बंद हड़ताल की घोषणा कर दी है। त्योहारी सीजन में सफाईकर्मियों के अचानक हड़ताल पर चले जाने से राजधानी भोपाल, हरदा, राजगढ़, विदिशा, नर्मदापुरम, रायसेन और भिंड सहित राज्य के दर्जनों जिलों में कचरा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है।

भोपाल नगर निगम की करीब 800 से अधिक डोर-टू-डोर कचरा गाड़ियों के पहिए पूरी तरह थम गए हैं। इसके चलते रिहायशी कॉलोनियों और मुख्य बस्तियों से कई मीट्रिक टन कचरा नहीं उठ सका है।

न्यू मार्केट, बिट्टन मार्केट, चौक बाजार, एमपी नगर और बैरागढ़ जैसे व्यस्ततम व्यावसायिक और पटाखा बाजारों में दुकानों के बाहर कचरे के बड़े-बड़े ढेर जमा हो गए हैं। त्योहारी खरीदारी के लिए निकल रहे आम नागरिकों और स्थानीय दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

नियमित झाड़ू न लगने और कचरा गाड़ियां न आने के कारण कई स्थानों पर व्यापारियों को खुद ही अपनी दुकानों के आसपास की सफाई करनी पड़ रही है, वहीं गंदगी और बदबू से माहौल खराब हो रहा है।

सफाई कर्मचारी संगठनों (मध्य प्रदेश अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस आदि) के अनुसार, वे वर्षों से अपनी न्यायसंगत मांगों को लेकर केवल आश्वासन पाते रहे हैं।

वर्षों से सेवाएं दे रहे सभी दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारियों को नियमित (पक्का) किया जाए।

नगरीय निकायों से आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा को पूरी तरह बंद किया जाए।

सभी सफाईकर्मियों को न्यूनतम 25,000 रुपये प्रति माह वेतन और समय पर एरियर का भुगतान किया जाए।

सेवा के दौरान मृत्यु होने पर आश्रित परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए और सफाईकर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।

नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारी नेताओं के बीच हुई शुरुआती दौर की वार्ता बेनतीजा रही है। कर्मचारी संघों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस लिखित आदेश जारी नहीं होते, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।

दीपावली के दौरान शहरों से रोजाना निकलने वाले कचरे की मात्रा 850 टन से बढ़कर 1,000 टन तक पहुंच जाती है। ऐसे में यदि हड़ताल का त्वरित हल नहीं निकला, तो त्योहार के मुख्य दिनों में शहरों में गंभीर स्वच्छता और स्वास्थ्य संकट गहराने की पूरी आशंका है।

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