स्वदेशी क्वाजी-बैलिस्टिक मिसाइल ‘प्रलय’ का सफल उड़ान परीक्षण, थलसेना और वायुसेना में जल्द शामिल होने का रास्ता साफ

pralay

नई दिल्ली। भारत ने अपनी सामरिक रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा तट के पास डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेशी रूप से विकसित सतह से सतह पर मार करने वाली क्वाजी-बैलिस्टिक मिसाइल ‘प्रलय’ का सफल उड़ान परीक्षण किया है। यह परीक्षण ‘यूज़र इवैल्यूएशन ट्रायल’ के हिस्से के रूप में सेना के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया गया, जिससे इस मिसाइल को भारतीय सशस्त्र बलों में आधिकारिक रूप से शामिल करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

यह उड़ान परीक्षण सुबह 11:10 बजे आयोजित किया गया। एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR), चांदीपुर द्वारा तैनात विभिन्न रेंज उपकरणों ने मिसाइल के उड़ान पथ, गति और सटीक लक्ष्य भेदने की क्षमता की पुष्टि की। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अपने सभी निर्धारित मानकों और उद्देश्यों को शत-प्रतिशत हासिल किया।

‘प्रलय’ मिसाइल का विकास DRDO की हैदराबाद स्थित ‘रिसर्च सेंटर इमारात’ (RCI) और अन्य प्रमुख प्रयोगशालाओं द्वारा स्वदेशी रूप से किया गया है, जबकि इसका उत्पादन भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) द्वारा किया जा रहा है।

यह कम दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 150 से 500 किलोमीटर तक है। यह 500 से 1,000 किलोग्राम तक के पारंपरिक पेलोड (पारंपरिक विस्फोटकों) को ले जाने में सक्षम है।

पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत, क्वाजी-बैलिस्टिक मिसाइल का पथ अर्ध-बैलिस्टिक होता है। यह हवा में ही अपनी दिशा बदलने और पैंतरेबाज़ी करने में सक्षम है, जिससे दुश्मन के एयर डिफेंस और मिसाइल इंटरसेप्टर सिस्टम के लिए इसे ट्रैक करना और हवा में नष्ट करना लगभग असंभव हो जाता है।

यह मिसाइल दिन, रात और प्रतिकूल मौसम की स्थिति में भी दुश्मन के बंकरों, मिसाइल ठिकानों, कमांड सेंटरों और रडार साइटों को पूरी सटीकता से तबाह करने की क्षमता रखती है।

भारत द्वारा अपनी ‘सशस्त्र बल रॉकेट फोर्स’ के गठन की दिशा में ‘प्रलय’ मिसाइल को रीढ़ की हड्डी माना जा रहा है।

चीन (LAC) और पाकिस्तान (LoC) सीमाओं के निकट तैनाती के लिए इसे विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। यह मिसाइल भारत की रणनीतिक पहुंच और सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और DRDO अध्यक्ष ने इस सफल परीक्षण पर वैज्ञानिकों, उद्योग भागीदारों और रक्षा बलों को बधाई देते हुए कहा कि यह उन्नत मिसाइल भारतीय सेना की तकनीकी परिचालन तैयारियों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

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