नई दिल्ली। भारत के इथेनॉल-ब्लेंडिंग (E20) कार्यक्रम को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच एक नया राजनीतिक और नीतिगत विवाद खड़ा हो गया है। कर्नाटक सरकार द्वारा राज्य के विभिन्न जिलों से लिए गए पेट्रोल नमूनों की जांच रिपोर्ट जारी करने के बाद, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और तेल कंपनियों पर निशाना साधा। हालांकि, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने इन आरोपों और जांच प्रक्रिया की प्रामाणिकता को सिरे से खारिज कर दिया है।
कर्नाटक सरकार द्वारा 7 जिलों से एकत्रित किए गए पेट्रोल नमूनों की एक स्वतंत्र प्रयोगशाला में जांच कराई गई। इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा तय सीमा 20% की जगह 30% से भी अधिक (31.2% तक) पाई गई है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाते हुए तंज कसा और कहा कि “E20 ईंधन अब 420 (धोखाधड़ी) बन चुका है”। उन्होंने आरोप लगाया कि आम नागरिक महंगे पेट्रोल के पैसे दे रहे हैं, लेकिन गाड़ियों में अत्यधिक इथेनॉल भरा जा रहा है, जिससे गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे हैं और माइलेज घट रहा है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल की मात्रा का पारदर्शी उल्लेख क्यों नहीं किया जा रहा है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कर्नाटक सरकार के दावों को बेबुनियाद बताते हुए स्पष्ट किया कि देश भर में (जिसमें कर्नाटक भी शामिल है) आपूर्ति किया जाने वाला E20 ईंधन भारतीय मानक ब्यूरो के निर्धारित मानकों के पूरी तरह अनुकूल है।
मंत्रालय और सार्वजनकि क्षेत्र की तीनों तेल कंपनियों ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा की गई जांच निर्धारित मानकों और मानक परीक्षण प्रक्रियाओं के तहत नहीं की गई है। तेल नमूनों के संकलन और उनकी स्वतंत्र प्रयोगशाला जांच में आवश्यक ‘सील और जॉइंट सैंपलिंग’ के नियमों का पालन नहीं हुआ।
मंत्रालय ने रेखांकित किया कि सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी और तेल कंपनियों की अपनी आंतरिक लैब लगातार पेट्रोल पंपों पर ईंधन की गुणवत्ता की निगरानी करती हैं और 20% की निर्धारित सीमा से अधिक सम्मिश्रण का सवाल ही पैदा नहीं होता।

