नई दिल्ली। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा, नवाचार और आर्थिक मजबूती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चार देशों के समूह क्वाड (Quad – भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम दिया है। अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान क्वाड सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों-भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग- ने इस नई पहल की घोषणा की।
क्वाड विदेश मंत्रियों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक पहुंच का विस्तार करने के लिए 8.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर (85 मिलियन डॉलर) से अधिक की वित्तीय व तकनीकी सहायता देने की साझा प्रतिबद्धता जताई है। तकनीकी आत्मनिर्भरता: इस कदम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के विकासशील देशों को आधुनिक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा गवर्नेंस और सुरक्षित तकनीक से जोड़ना है, ताकि किसी एक देश के तकनीकी वर्चस्व को संतुलित किया जा सके।
अमेरिका ने भारत और आसियान (ASEAN) देशों में इलेक्ट्रॉनिक कचरे और औद्योगिक अवशेषों से महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे लिथियम, कोबाल्ट, दुर्लभ भू-तत्व) को फिर से निकालने और उनके पुनर्चक्रण (Recycling) के ढांचे को विकसित करने के लिए 1 करोड़ अमेरिकी डॉलर (10 मिलियन डॉलर) देने की घोषणा की है। मजबूत सप्लाई चेन: इस पहल से ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल), बैटरी विनिर्माण और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए आवश्यक क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन सुरक्षित होगी तथा चीन पर निर्भरता को कम करने में मदद मिलेगी।आर्थिक व
बैठक के दौरान मंत्रियों ने व्यापार, निर्यात क्रेडिट एजेंसियों के बीच सहयोग और समुद्री सुरक्षा पहलों पर भी प्रगति की समीक्षा की। क्वाड नेताओं का मानना है कि एआई और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे उभरते क्षेत्रों में यह सहयोग न केवल आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करेगा, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नई तकनीकी और आर्थिक संभावनाओं के द्वार खोलेगा।

