नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दायर बहुचर्चित कथित रिश्वतखोरी मामले में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के पूर्व संयुक्त औषधि नियंत्रक और तीन अन्य प्रमुख आरोपियों को शनिवार को सभी आरोपों से पूरी तरह बरी (Discharge) कर दिया।
विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) विशाल पाहुजा की अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि सीबीआई और अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया भी कोई ठोस मामला साबित करने में पूरी तरह से विफल रहा है।
अदालत के इस फैसले से दवा उद्योग और नियामक संस्था से जुड़े चार प्रमुख लोगों को राहत मिली है:
डॉ. ईश्वर रेड्डी सनपा रेड्डी: सीडीएससीओ के पूर्व संयुक्त औषधि नियंत्रक।
अनिमेष कुमार: सीडीएससीओ के वरिष्ठ अधिकारी।
गुलजीत सेठी उर्फ गुलजीत चौधरी: ‘बायोइनोवैट रिसर्च सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ की निदेशक।
दिग्गज फार्मा कंपनी ‘बायोकॉन बायोलॉजिक्स लिमिटेड’ के एसोसिएट उपाध्यक्ष।
यह पूरा मामला एक इंसुलिन इंजेक्शन के तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल में छूट देने और दवा को मंजूरी दिलाने से जुड़ा हुआ था। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि बायोकॉन बायोलॉजिक्स की दवा को फायदा पहुँचाने और मंजूरी की प्रक्रिया को तेज करने के लिए बिचौलियों के जरिए सीडीएससीओ अधिकारियों को लाखों रुपये की रिश्वत का लेन-देन किया गया था। इस मामले में सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश विशाल पाहुजा ने सबूतों का गहनता से विश्लेषण किया। अदालत ने पाया कि सीबीआई द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों, कॉल रिकॉर्डिंग्स और बयानों में कोई ऐसा प्रत्यक्ष या पुख्ता कानूनी सबूत मौजूद नहीं था, जो यह साबित कर सके कि किसी रिश्वत का आदान-प्रदान या आपराधिक साजिश रची गई थी।
कोर्ट ने माना कि केवल संदेह के आधार पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता और साक्ष्यों के अभाव में सभी चार आरोपियों को बिना ट्रायल का सामना किए ही मामले से बरी (Discharged) कर दिया गया। इस फैसले को सीबीआई के जांच पक्ष के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

