नेपाल की पूर्व राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने नेपाल, भारत और चीन के बीच त्रिपक्षीय सहयोग पर दिया जोर

Bidya

नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन के गंभीर वैश्विक संकट और हिमालयी क्षेत्र पर मंडराते पर्यावरणीय खतरों के बीच नेपाल की पूर्व राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और पर्यावरण-अनुकूल पहल का आह्वान किया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि हिमालयी क्षेत्र के तीन प्रमुख देशों—नेपाल, भारत और चीन—को आपसी मतभेद भुलाकर पर्यावरण संरक्षण, मौसम डेटा साझा करने और आपदा प्रबंधन के लिए एक मजबूत त्रिपक्षीय रणनीतिक सहयोग कायम करना चाहिए।

पूर्व राष्ट्रपति ने सुझाव दिया है कि तीनों देशों को आपस में मौसम और वायुमंडलीय परिवर्तनों से जुड़े वैज्ञानिक आंकड़े नियमित रूप से साझा करने चाहिए, ताकि अचानक होने वाले जलवायु बदलावों का सटीक अनुमान लगाया जा सके।

हिंदूकुश-हिमालय क्षेत्र में तेजी से पिघलते ग्लेशियरों और उनसे बनने वाली खतरनाक ग्लेशियल झीलों पर चिंता व्यक्त करते हुए, उन्होंने तीनों देशों के वैज्ञानिकों और एजेंसियों के साझा निगरानी तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया।

बाढ़, भूस्खलन और आपदाओं से समय रहते लोगों की जान बचाने के लिए सीमाओं के पार भी प्रभावी और आधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करने की पुरजोर पैरवी की गई।

प्राकृतिक आपदाओं के समय त्वरित राहत व बचाव कार्यों के लिए तीनों देशों की प्रशासनिक व आपदा प्रबंधन एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया गया है।

हिमालयी क्षेत्र को ‘पृथ्वी का तीसरा ध्रुव’ भी कहा जाता है, जहां स्थित ग्लेशियर दक्षिण एशिया की प्रमुख नदियों के जल का मुख्य स्रोत हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में हो रही वृद्धि का सीधा असर करोड़ों लोगों की जल सुरक्षा, आजीविका और जीवन पर पड़ रहा है।

नेपाल की पूर्व राष्ट्रपति का यह सुझाव इस मायने में बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि भारत, चीन और नेपाल का यह साझा त्रि-स्तरीय प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है, बल्कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र में वैज्ञानिक सहयोग और कूटनीतिक स्थिरता को भी नया बल प्रदान करेगा।

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