नई दिल्ली। देश में चांदी के कारोबार को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने चांदी की रिफाइनरियों और टकसालों (मिस्र) के लिए एक विशेष प्रमाणन योजना की शुरुआत की है।
इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य बाजार में बिकने वाली चांदी की सिल्लियों और सिक्कों की शुद्धता सुनिश्चित करना तथा उन पर हॉलमार्किंग की प्रक्रिया को बढ़ावा देना है। इस योजना का ऐलान ‘विश्व मानक दिवस 2026’ के अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान किया गया।
इस नई व्यवस्था के तहत भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) संबंधित चांदी रिफाइनरियों और टकसालों की तकनीकी क्षमताओं, उनकी शोधन (रिफाइनिंग) प्रक्रियाओं और गुणवत्ता जांच से जुड़ी सुविधाओं का बारीकी से आकलन करेगा। सभी मानकों पर खरी उतरने वाली इकाइयों को ही बीआईएस द्वारा लाइसेंस प्रदान किया जाएगा।
एक बार लाइसेंस मिलने के बाद, ये अधिकृत इकाइयां निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप चांदी की सिल्लियों और सिक्कों पर आधिकारिक बीआईएस हॉलमार्क अंकित कर सकेंगी, जिससे उपभोक्ताओं और निवेशकों को शुद्धता का सौ फीसदी भरोसा मिल सकेगा।
जानकारों का मानना है कि इस योजना के लागू होने से भारत के सर्राफा बाजार (बुलियन मार्केट) में अनियंत्रित और मिलावटी सामान की बिक्री पर लगाम लगेगी। साथ ही, खरीदारों, निवेशकों और आभूषण निर्माताओं को उच्च गुणवत्ता वाली प्रमाणित चांदी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।

