नई दिल्ली। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चल रही कानूनी और राजनीतिक खींचतान के बीच, भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने उच्चतम न्यायालय में अपना पक्ष मजबूती से रखा है। सोमवार को कोर्ट में दाखिल 248 पृष्ठों के विस्तृत हलफनामे में निर्वाचन आयोग ने एसआईआर की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह वैध, कानून सम्मत और संवैधानिक दायरे के भीतर बताया है। साथ ही, मुख्य निर्वाचन आयुक्त के फैसलों और एसआईआर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं का पुरजोर खंडन किया है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि एसआईआर और उससे जुड़े तमाम प्रशासनिक आदेश निर्वाचन आयोग के तीनों सदस्यों (पूर्ण आयोग) द्वारा सर्वसम्मति से अनुमोदित किए गए थे, जिससे इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और सामूहिक निर्णय क्षमता पूरी तरह साबित होती है।
याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए उन गंभीर आरोपों को आयोग ने सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि एसआईआर के दौरान मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले वैधानिक ‘फॉर्म-6’ में छेड़छाड़ या बदलाव किया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है और यह पूरी तरह से वैधानिक नियमों के अनुरूप ही संचालित हो रहा है।
निर्वाचन आयोग ने कोर्ट को बताया कि मतदाता सूचियों की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एसआईआर चलाना उसका संवैधानिक और कानूनी अधिकार है, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के पूरी तरह अनुकूल है।
यह मामला ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण हो गया है जब विभिन्न राजनीतिक दल और विपक्षी संगठन मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया की निष्पक्षता और तौर-तरीकों को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। निर्वाचन आयोग के इस कड़े और तथ्यात्मक जवाब से यह स्पष्ट हो गया है कि आयोग चुनावी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अपनी वैधानिक शक्तियों के उपयोग पर पूरी तरह दृढ़ है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की आगामी सुनवाई के दौरान इन तर्कों पर और विस्तार से बहस होने की संभावना है।

